T-29

T-29/56 दिल ने दरयाफ़्त कर लिया है मुझे-ज़ुल्फ़िक़ार ‘आदिल’

साहिबो, तरही 6 मई को ख़त्म हो चुकी। 8 मई यानी दो दिन बाद पोस्ट करना मेरी ग़लती है। ये गज़ल इस तरही मिसरे के शायर ज़ुल्फ़िक़ार आदिल साहब ने मुझे whatsapp से भेजी। मैं देखना ही भूल गया। इसकी सज़ा शायर को नहीं मिलनी चाहिये इसलिये आपकी नाराज़गी मेरे सर मगर ग़ज़ल तो पोस्ट […]

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T-29/55 तन्हा तन्हा वो क्यूँ लगा है मुझे-अफ़सर दकनी

मित्रो, तरही 6 मई को ख़त्म होनी थी। 8 मई यानी दो दिन बाद पोस्ट करना मेरी ग़लती है। ये दोनों गज़लें मुझे whatsapp से दोस्तों ने भेजीं। मैं देखना ही भूल गया। इसकी सज़ा शायर को नहीं मिलनी चाहिये इसलिये आपकी नाराज़गी मेरे सर मगर ग़ज़ल तो पोस्ट होनी ही चाहिये। तुफ़ैल चतुर्वेदी तन्हा […]

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T-29/54 ज़िन्दगी से तो और क्या है मुझे-इमरान हुसैन ‘आज़ाद’

ज़िन्दगी से तो और क्या है मुझे बस ज़रा वक़्त काटना है मुझे तुझको देखा तो ये लगा है मुझे इश्क़ सदियों से जानता है मुझे आशना सड़कें, अजनबी चेहरे शह्र में और क्या दिखा है मुझे लोग क़ीमत मिरी लगाते हैं किस जगह तूने रख दिया है मुझे सुब्ह रुख़्सत करे मकाँ मेरा शाम […]

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T-29/53-2 ओज पर तुझको देखना है-“समर कबीर”

ओज पर तुझको देखना है मुझे पत्र में उसने ये लिखा है मुझे नस्ले-नौ से मदद का तालिब हूँ बुर्ज नफ़रत का तोड़ना है मुझे क्या कहूँ, कब मिलेगा मीठा फल सब्र करना तो आ गया है मुझे आज तेरे बग़ैर ये जीवन नर्क जैसा ही लग रहा है मुझे लाख दुश्वारियाँ हों, जाऊँगा इश्क़ […]

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T-29/52 वो कि मुड़-मुड़ के देखता है मुझे-आशीष नैथानी ‘सलिल’

वो कि मुड़-मुड़ के देखता है मुझे ये ख़मोशी बड़ी सदा है मुझे चाँद तारों से दोस्ती है मिरी मुद्दतों से मुग़ालता है मुझे तुमको खो कर बिखर गया हूँ मैं मेरा होना भी सालता है मुझे बहता दरिया उछालकर बूँदें ख़ामुशी से जगा रहा है मुझे ज़िन्दगी तेरे ग़म कहूँ किससे किसने आराम से […]

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T-29/51 तुमने अपना जो कह दिया है मुझे-राहुल ‘राज’

तुमने अपना जो कह दिया है मुझे आइना रोज़ देखता है मुझे सामने वाले घर में रहता है चाँद छत पर अभी दिखा है मुझे पढ़ सको तो पढ़ो मिरी आँखें इनमें सब है जो बोलना है मुझे मैं मुहब्बत के रास्ते पर हूँ ‘अपने अंजाम का पता है मुझे’ दर्द, तन्हाई, अश्क का सैलाब […]

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T-29/50 उसके अहसास ने छुआ है मुझे-सत्य चंदन

उसके अहसास ने छुआ है मुझे इसका मतलब वो सोचता है मुझे इश्क़ की मैं किताब था लेकिन तेरी नज़रों ने कब पढ़ा है मुझे जब्त का हो गया हूँ जब आदी तब मयस्सर हुई दवा है मुझे ?? क्यों चले जब सफ़र से थे अनजान बस जुनूँ से यही गिला है मुझे ज़िन्दगी कुछ […]

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