T-6

T-6/33 मुश्किलों में ही मुस्कुराये हम-‘तुफ़ैल’ चतुर्वेदी

मुश्किलों में ही मुस्कुराये हम धूप पड़ने से लहलहाये हम चुन रहे हैं ज़मीन से कांटे आसमां पर नज़र जमाये हम इक सदी में सुनी तिरी आवाज़ एक मुद्दत में मुस्कुराये हम दरे-महबूब है दरे-महबूब कब का दुनिया को छोड़ आये हम उसके ग़म से कलाम करते हैं शेह्र भर को हदफ़ बनाये हम कुछ […]

Rate this:

T-6/32 और फिर खुल के मुस्कुराये हम – आदिक भारती

देर तक अश्कों में नहाये हम और फिर खुल के मुस्कुराये हम सच की ख़ातिर हुए इकट्ठा जो आदमी थे गिने-गिनाये हम वो तो वादों में ही बहुत ख़ुश थे अज़्म ये भी निभा न पाये हम उनकी तस्कीन ही नहीं होती चाँद-तारे भी तोड़ लाये हम छाँव का ज़ाइक़ा नहीं मालूम ‘उम्र भर धूप […]

Rate this:

T-6/31 उनकी ज़ुल्फ़ों के साये-साये हम-अब्दुस्सलाम ‘कौसर’

उनकी ज़ुल्फ़ों के साये-साये हम धूप क्या है न जान पाये हम जब भी अपनों के काम आये हम वाक़या है लहू नहाये हम तुहमतें,ज़िल्लतें,ग़लतफ़हमी प्यार में सब खरीद लाये हम मुस्कुराते ही नम हुईं आँखें कर्ब दिल का छुपा न पाये हम एक मासूम गोद में आया अपने बचपन में लौट आये हम ज़िन्दगी […]

Rate this:

T-6/30 सारी दुनिया में घूम आये हम-फ़ानी जोधपुरी

सारी दुनिया में घूम आये हम बस ख़ुशी को न ढूंढ पाए हम हमको साया कभी मिला ही नहीं उम्र भर धुप में नहाये हम ऐ ग़ज़ल इश्किया बुला न हमें तेरी गलियों को छोड़ आये हम ज़र,ज़मीं,ओहदे,तमग़े और सनद खो के खुद को ये चीज़ें लाये हम बस इसी बात का मलाल रहा दर्द […]

Rate this:

T6/29 ज़िन्दगी!! ये समझ न पाये हम –मयंक अवस्थी

ज़िन्दगी!! ये समझ न पाये हम तेरे अपने हैं या पराये हम तेरा चेहरा न देख पाये हम उम्र भर सर रहे झुकाये हम किसको मालूम खुश्क आँखो में इक समन्दर रहे छुपाये हम राह दुश्मन की तंग होती रही इस मुरौव्वत से पेश आये हम हैफ!! पगड़ी उछालने वालों तुमको सर पर रहे चढाये […]

Rate this:

T-6/28 देर तक छाँव को न भाये हम-शैलजा नरहरि

देर तक छाँव को न भाये हम उम्र भर धूप में नहाये हम रास्ते गुमरही के थे जिसके उस क़बीले को छोड़ आये हम बज़्म में आज़ वो न पहचाने जिन की यादों में मुस्कुराये हम ज़िन्दगी भी ज़मीं पे मिलती है मौत को क्यूँ ख़रीद लाये हम अब परिन्दे तलक नहीं आते जिस दरीचे […]

Rate this:

T-6/27 हाथ जोड़े न गिड़गिड़ाये न हम-‘शफ़ीक़’ रायपुरी

हाथ जोड़े न गिड़गिड़ाये न हम चोट खा कर भी मुस्कुराये हम हर मुसीबत में काम आये हम और अब हो गये पराये हम अपने बच्चों के रिज्क की खातिर ‘उम्र भर धूप में नहाये हम’ खूं जला है अदब की दुनिया में नाम यूँ ही नहीं कमाये हम अपनी सादा-मिज़ाजी ले डूबी हर क़दम […]

Rate this: