T-27

T-27/25 छुपा ले ज़ख़्मों को और क़हक़हों को जारी रख-तुफ़ैल चतुर्वेदी

छुपा ले ज़ख़्मों को और क़हक़हों को जारी रख किया है इश्क़ तो फिर इसकी पासदारी रख यहाँ पे अश्क लुटाते हैं ज़ायक़े के लिये ग़ज़ल का शहर है इसकी ज़मीन खारी रख दबी-दबाई हुई आहों से बनेगा न काम छुपा न कुछ भी हुज़ूर उसके, बात सारी रख ये तालमेल ज़रूरी है ज़िन्दगी के […]

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T-27/28 मिज़ाज में कहीं थोड़ी सी बुर्दबारी रख-असलम अलाहाबादी

मिज़ाज में कहीं थोड़ी सी बुर्दबारी रख कहीं पे हल्की कहीं पर ज़ुबान भारी रख ये शह्र शहरे-मुहब्बत है हर क़दम पे यहाँ ज़रूरी है कि तबीयत में इंकिसारी रख जो चाहता है उजालों का इख़्तिताम न हो क़दम-क़दम पे अंधेरों से जंग जारी रख जो वक़्त पर तिरी हर बात अनसुनी कर दें न […]

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T-27/27 ऐ सर्द रात ज़रा मुझमें बेक़रारी रख-दिनेश नायडू

ऐ सर्द रात ज़रा मुझमें बेक़रारी रख सभी गुज़ारे हुए दौर बारी-बारी रख ये शाम काटने वाले हैं साथ नज़्मों के हम अपने सामने तस्वीर इक तुम्हारी रख बिछड़ने वाले मिरी आखिरी गुज़ारिश है तू अपने साथ ही मेरी ये उम्र सारी रख वो लौट आएगा, उसको तो लौटना होगा दिवाने अपनी सदाओं का दौर जारी […]

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T-27/26 मिरी जो मान तो साइड में दुनियादारी रख-इरशाद ख़ान सिकंदर

मिरी जो मान तो साइड में दुनियादारी रख मिरे अज़ीज़ मुहब्बत का काम जारी रख समझ सके तो समझ वक़्त की ज़रूरत को बना इक इश्क़ का मंदिर मुझे पुजारी रख फ़ज़ा में चारों तरफ़ शोर है धुआँ सा है कुछ अपने आप से बाहर भी जानकारी रख तमाशे देख तमाशों से भागता क्यों है […]

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T-27/24 तू इसको छोड़ उसी की तलाश जारी रख-दिनेश कुमार स्वामी ‘शबाब’ मेरठी

तू इसको छोड़ उसी की तलाश जारी रख चराग़ कौन बुझाता है जानकारी रख नशे में आज न कोई भी राज़दारी रख शराब और पी लेकिन बयान जारी रख हुआ शुरूअ अगर टूटने का दौर तो क्या तू अपने आप पे थोड़ी सी अख़्तियारी रख अभी तो शब की मुंडेरों पे चाँद बैठा है कुछ […]

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T-27/23 कहीं तो लहजे में थोड़ी सी इंकिसारी रख-गोविन्द गुलशन

कहीं तो लहजे में थोड़ी सी इंकिसारी रख है क़ुर्बतों का तक़ाज़ा लिहाज़दारी रख बुझी-बुझी हुई आँखें, धुआँ-धुआँ चेहरा हुए हैं ग़म तुझे हासिल तो आबदारी रख कहीं तो है वो किसी को मिले, मिले न मिले तलाश उसकी अगर है तलाश जारी रख ये बेख़याली न तुझको तबाह कर डाले ‘छुपाके यार तबस्सुम में […]

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T-27/22 तू अपने ज़ब्त की इतनी तो पासदारी रख-डॉ मुहम्मद आज़म

तू अपने ज़ब्त की इतनी तो पासदारी रख ‘छुपा के यार तबस्सुम में बेक़रारी रख’ भले ही ज़ात में तू अपनी ख़ाकसारी रख समझ न ले कोई बुज़दिल ये वज़अदारी रख न हिर्स रख, न हवस रख, न होशियारी रख किसी भी दोस्त से रिश्ता न कारोबारी रख बिसात है अगर ऑडी भी रख, फ़रारी […]

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