T-22

T-22 तरही-22 का समापन-तुफ़ैल चतुर्वेदी

साहिबो, लफ़्ज़ की बाईसवीं तरही महफ़िल ख़त्म हुई। ख़ासी मज़ेदार अच्छी ग़ज़लें आयीं। तिरेपन अच्छी तादाद मानी जायेगी। मेरे नज़दीक तरही का मक़सद सिर्फ इतना है कि हम सब के ज़हन रवां हो जायें। इस बार की बहर ग़च्चा देने वाली थी। कई दोस्तों को फ़ाइलातुन फ़यलातुन फ़ेलुन की जगह फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन की दिक़्क़त […]

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T-22/53 दिल के ज़ख़्मों में उतर जाना है-दिनेश कुमार स्वामी ‘शबाब’ मेरठी

दिल के ज़ख़्मों में उतर जाना है मैं हूँ मरहम मुझे घर जाना है ख़ुश्क दरिया में उतर जाना है प्यास को डूब के मर जाना है घर की हर शय में वही है हर सू उसका जाना भी ठहर जाना है इश्क़ इक ज़िद के सिवा कुछ भी नहीं और ज़िद ये है कि […]

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T-22/52 आप कहते हैं उधर जाना है-‘अयाज़’ संबलपुरी

आप कहते हैं उधर जाना है आस कहती है इधर जाना है तुम हो आज़ाद ख़ुशी से जाओ अपनी मर्ज़ी से जिधर जाना है बज़्मे-हस्ती की तजल्ली में हमें अच्छी सुहबत में निखर जाना है मौत से आँख मिलते ही हमने ‘आज हर हद से गुज़र जाना है’ आपकी ज़ुल्फ़े-परीशां को ‘अयाज़’ करके तदबीर संवर […]

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T-22/51 मेरा घर है न ! उधर जाना है-नवनीत शर्मा

मेरा घर है न ! उधर जाना है और उदासी को किधर जाना है अपने होने का असर जाना है एक पुरख़ार सफ़र जाना है चाहता हूं मुझे जोड़े भी वही जिसके छूते ही बिखर जाना है आंख खोलो कि वो था इश्‍तेहार जिसको कल तुमने ख़बर जाना है जब नदी उसमें हुई ख़ुद तहलील […]

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T-22/50 लाख ख़तरा हो मगर जाना है-सुख़नवर हुसैन

लाख ख़तरा हो मगर जाना है ‘आज हर हद से गुज़र जाना है’ याद रक्खे ये ज़माना हमको काम कुछ ऐसा भी कर जाना है लाख परदे में छिपा लें चेहरा उनकी जानिब तो नज़र जाना है इससे बेहतर है वादा न करो वादा करके जो मुकर जाना है कौन रहता है बुलंदी पे सदा […]

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T-22/49 जाय ये सर भी अगर जाना है-दीपक रूहानी

जाय ये सर भी अगर जाना है ‘आज हर हद से गुज़र जाना है’ आज भी शाम तवाज़ुन में गयी उठ के मैख़ाने से घर जाना है वो जो सोया रहा दिन भर उसने शाम होने को सहर जाना है तुमको पाना भी है एक ख़ाबे-हसीं देखते-देखते मर जाना है सब के सब मेरे मुख़ालिफ़ […]

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T-22/48 सर तिरी ज़ुल्फ़ को कर जाना है-अब्दुल अहद ‘साज़’

सर तिरी ज़ुल्फ़ को कर जाना है ‘आज हर हद से गुज़र जाना है’ घर को मीयादे-सफ़र जाना है फिर भी हमने इसे घर जाना है सहब से हमने लगाया हैं सुराग़ ऐब को हमने हुनर जाना है एक दिन राज़ को होना है अयां आख़िरश ज़ख़्म को भर जाना है लाज रखनी है सदाक़त […]

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