T-2

T-2/40 किया सब उसने सुन कर अनसुना क्या-पवन कुमार

किया सब उसने सुन कर अनसुना क्या वो खुद में इस क़दर था मुब्तिला क्या मैं हूँ गुज़ारा हुआ सा एक लम्हा मिरे हक़ में दुआ क्या बद्दुआ क्या किरण आयी कहाँ से रौशनी की अँधेरे में कोई जुगनू जला क्या मुसाफ़िर सब पलट कर जा रहे हैं ‘यहाँ से बंद है हर रास्ता क्या’ […]

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T-2/39 खुदी को कर दिया खुद से जुदा क्या–शेषधर तिवारी

खुदी को कर दिया खुद से जुदा क्या खुद अपने आप से तू है खफा क्या निखरती जा रही है बदनसीबी इसे लगती नहीं है बद्दुआ क्या खुदा तू सुन लिया करता था मन की सदा सुन सुन के बहरा हो गया क्या चले जिस राह पर शेखो बिरहमन जहन्नुम का वही है रास्ता क्या […]

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T-2 तरही पोस्टिंग 17 तारीख़ तक जारी रहने का स्पष्टीकरण -तुफ़ैल चतुर्वेदी

आप सोच रहे होंगे कि 15 तक तरही मुशायरा जारी रहना था. मगर 17 तक हलचल क्यों है. साहब गुनाहगार मेरा कम्प्यूटर है और सज़ावार मैं हूँ. मेरा इन्टरनेट 14 की दोपहर से 16 की दोपहर तक ख़राब था. जो ग़ज़ल 16 -17 में दिखाई दे रही हैं, वो मेरे मेल में 14 -15 को आ गयी […]

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T-2/38 बतायें तो बतायें हम भला क्या-प्रमोद लाल

बतायें तो बतायें हम भला क्या महब्बत है महब्बत के सिवा क्या उचटती सी नज़र डाली थी हम पर मगर उस इक नज़र का पूछना क्या तिरे कूचे से गुज़रें भी अगर हम समझ लेते हैं जाने लोग क्या क्या अब इन बातों की आदत डाल लो तुम यहाँ ऐसा ही होता है, गिला क्या […]

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T-2/36 असर कहने का कुछ इस पर हुआ क्या-अभय कुमार अभय

असर कहने का कुछ इस पर हुआ क्या सुना तक भी नहीं मैंने कहा क्या मैं खुश-किरदार हूँ ये सच है लेकिन अंधेरों में करेगा आइना क्या चलो तुम हो गए बेजार हम से ज़िआदा इस से अब हो जायेगा क्या उतर कर उनकी आँखों में कभी तो ज़रा देखें दरे-रहमत खुला क्या मेरे जुर्मे- […]

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T-2/35 मुसाफ़त में है आगे मरहला क्या-असरार किठोरवी

मुसाफ़त में है आगे मरहला क्या मैं इस बारे में नाहक सोचता क्या बहुत आरामे-जाँ भी खुशमज़ा क्या बराबर है मकां क्या मक़बरा क्या खसारा ज़िन्दगी का हर नफ़स है उठाएं ज़िन्दगी से फ़ायदा क्या कभी आगे कभी पीछे है साया जिहादे-उम्र ने आखिर दिया क्या हुआ क्यूँ शहर बदरूहों का जंगल यहाँ इंसान बसते […]

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T-2/34 यही है इस सफ़र की इन्तहा क्या-किशन स्वरूप

यही है इस सफ़र की इन्तहा क्या यहाँ से बंद है हर रास्ता क्या जिसे देखा वही मुफलिस लगा तो बता फिर मैं किसी से मांगता क्या गुज़रते वक़्त ने सूरत बदल दी मुझे पहचान पाता आइना क्या अदालत से उमीदें न्याय की थीं अदालत ने दिया है फैसला क्या दवाएं तो हुई हैं बेअसर […]

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