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दोस्तो, एक बहुत ख़ुशरंग इज़ाफ़े की जानकारी-तुफ़ैल चतुर्वेदी

दोस्तो, एक बहुत ख़ुशरंग इज़ाफ़े की जानकारी आप सबको देनी थी। सच्चाई ये है कि काफ़ी समय से मैं लफ्ज़ पोर्टल के साथ न्याय नहीं कर पा रहा हूँ। कुछ निजी व्यस्तताएं घेरे हुए हैं तो कुछ सामजिक प्राथमिकता कारण बनी हुई हैं। नतीजा यह है कि केवल तरही के समय कुछ हंगामा रहता है […]

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अतीत से समाज की विडम्बना समान है

अतीत से समाज की विडम्बना समान है। ‘लकीर के फ़क़ीर’ विश्व का यही विधान है।। अबाध वेग से यही प्रभायमान हो रहा। समाज के लिये मरे, वही मनुष्य रो रहा।१। चलो कि ये विधान मोड़ के रचें नवीनता। चलो कि छीन लायँ आज वक़्त से मलीनता।। समस्त दिग्दिगांत झूम जायँ वो प्रयास हो। अखण्ड मानवाधिकार […]

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दीपावली – दीपावली – दीपावली

नवगीत :- हर साल मेरी रूह को कर डालती है बावली दीपावली दीपावली दीपावली इक वज्ह है ये मुस्कुराने की फ़लक से, आँख उट्ठा कर मिलाने की घरों को रोशनी से जगमगाने की गले मिलने मिलाने की वो हो मोहन कि मेथ्यू या कि हो ग़ुरबत अली दीपावली दीपावली दीपावली हृदय-मिरदंग बजती है तिनक धिन […]

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