Ghazals

T-33/29 उसपे ख़ुद को निसार करना था. द्विजेन्द्र द्विज

उसपे ख़ुद को निसार करना था इश्क़ क्या बार-बार करना था? अपना यूँ कारोबार करना था ख़ुद को इक इश्तिहार करना था ज़ीस्त को पुर-बहार करना हश्र तक इन्तज़ार करना था ग़म अता थी तो उसमें लुत्फ़ आता यह भी परवरदिगार करना था उससे हम इल्तिजा भी क्या करते खु़द को ही शर्मसार करना था […]

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T-33/28 प्यार को यादगार करना था. अज़्हर इनायती

प्यार को यादगार करना था, इश्क़ दीवानावार करना था लोग जल्दी में थे बदलने की, वक़्त का इंतज़ार करना था सबको हैरत थी पर मुकद्दर को, उसको ही शह्रयार करना था हल अकेला था मैं मसाइल का, मश्वरा किससे यार करना था थोड़ा पानी था अपनी छागल में, और हमें दश्त पार करना था सबसे […]

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T-33/27 दर्द पर इख़्तियार करना था. शबाब मेरठी

दर्द पर इख़्तियार करना था, उनको बेरोज़गार करना था. रौशनी इश्तिहार मैख़ाने, सबको मेरा शिकार करना था. उसने वादा किया था फिर मुझसे, फिर मुझे इंतज़ार करना था. इक बहाना था मुस्कुराना तो, यास को ग़मगुसार करना था. धूप का काम सब दरारों को, सुब्ह का इश्तिहार करना था. इश्क़ का काम ही अनारकली, बादशाहत […]

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T-33/26 मुझको अपना कहार करना था. बकुल देव

मुझको अपना कहार करना था, कब उसे दश्त पार करना था ? सदके में जुनूं के दामन के, पैरहन तार तार करना था. दरिया करना था अश्क को पहले, फिर उसे बेकनार करना था. शह्रयारी के और थे आदाब, पहले अपनों पे वार करना था. बह्स मंज़िल से कुछ न थी,उनको, शिकव ए रहगुज़ार करना […]

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T-33/25 बस यही इक विचार करना था. अब्दुल अहद ‘साज़’

बस यही इक विचार करना था हम को क्यार इख़्तियार करना था हम कि फ़र्ज़ान-ए-जुनूं ठहरे ज़ह्न को तार तार करना था इस गुमां पर हो उस तरफ साहिल हमको ये दश्त पार करना था आखि़रेकार कर न पाए हम वो जो अंजाम-ए-कार करना था शुअलगी तक था नग़्मगीं का सफ़र शायरी को शरार करना […]

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T-33/24 दिलनवाज़ी से प्यार करना था. सैयद नासिर अली

दिलनवाज़ी से प्यार करना था रूह को ख़ुशगवार करना था छांव ठंडी जहां को मिल जाती ज़ीस्त को सायादार करना था मालिके दो जहां है बंदानवाज़़ उसके बंदों से प्याार करना था जि़ंदगी एक बार मिलती है ज़ात को बावक़ार करना था बात की तह तलक पहुंच जाते सौ तरह से विचार करना था हमने […]

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T-33/23 बस ज़रा फेरफार करना था – नवीन

बस ज़रा फेरफार करना था। दायरों को दयार करना था॥ अब तो हम ख़ुद नहीं रहे उसके। जिस पर एकाधिकार करना था॥ नित बिगड़ते ही जा रहे हैं हम। जबकि हमको सुधार करना था॥ रामजी ने तो कुछ कमी न रखी। कुछ हमें भी विचार करना था॥ हार भी अपनी जीत भी अपनी। फ़ैसला इस […]

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