T-21

T-21/37 ज़बां रखेंगे जो सच बोल-बोल के रौशन-फ़ज़ले-अब्बास ‘सैफ़ी

ज़बां रखेंगे जो सच बोल-बोल के रौशन वो ले के जायेंगे मुंह रब के सामने रौशन पड़ी न हमको ज़रूरत कभी उजालों की सफ़र में इतने थे पैरों के आबले रौशन नमाज़ ने जो बनाया है तेरे माथे पर करेगा दाग़ वही क़ब्र में दिये रौशन सिवा अँधेरे के कुछ और जिन के पास नहीं […]

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T-21/36 हँसे जो लब तो सभी ज़ख़्म हो गए रौशन-मुमताज़ नाज़ां

हँसे जो लब तो सभी ज़ख़्म हो गए रौशन जला जो दिल तो हुए दिल के ग़मकदे रौशन जो ख़ुद को ढूंढा तो क्या क्या मिला बतायें क्या कि हम पे हो गये आलम के ज़ाविये रौशन मरो तो ऐसे कि जीने को रश्क आ जाये चलो तो ऐसे कि हो जायें आबले रौशन किए […]

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T-21/35 तू कह रहा है तिरे सब हैं ज़ाविए रौशन-द्विजेन्द्र द्विज

तू कह रहा है तिरे सब हैं ज़ाविए रौशन `क़लम सम्भाल अँधेरे को जो लिखे रौशन’ चमक-दमक में तू बीनाई बख़्शना मौला हर एक गाम पे मिलते हैं आइने रौशन वगरना इनको अँधेरा निगल चुका होता हमारे अज़्म ने रक्खे हैं हौसले रौशन बहुत सँभाल के रखता हूँ अपने अश्कों को ये मेरी आँखों में […]

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T-21/34 तुम्हारी ज़ात से निकले जो ज़ाविये रौशन-नाज़िम नक़वी

तुम्हारी ज़ात से निकले जो ज़ाविये रौशन मिरे ख़याल के सारे तबक़ हुए रौशन किसी ने उसको तजल्ली किसी ने बर्क़ कहा वो रौशनी के मुक़ाबिल जो हो गये रौशन अता हो मेरे क़लम को तुम्हारे नाम के साथ वो रौशनाई जो करती हो हाशिये रौशन वो रौशनी को अंधेरा लिखे तो फ़िक्र न कर […]

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T-21/33 जो कोहे-नूर की मानिंद हो दिखे रौशन-नूरुद्दीन ‘नूर’

जो कोहे-नूर की मानिंद हो दिखे रौशन “क़लम संभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन जहाँ में अहले-जुनूं के ही दम से बाक़ी है वफ़ा, ख़ुलूसो-मुहब्बत के सिलसिले रौशन हनोज़ दर्द के धीमे चराग़ जलते हैं तसव्वुरात में अब तक हैं रतजगे रौशन हमारे अहद की आँखों से हो गए ओझल मुहब्बतों के वो रंगीन क़ुमक़ुमे […]

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T-21/32 उमीद सुब्ह से थी होंगे रास्ते रौशन-बकुल देव

उमीद सुब्ह से थी होंगे रास्ते रौशन सहर ने सिर्फ़ अंधरे मगर किये रौशन वो इतने ध्यान से सुनता है दास्ताँ मेरी कि होने लगते हैं किरदार अनकहे रौशन तमाम गर्दे-सफ़र तो मैं साथ ले आया हुए तो होंगे मिरे बाद क़ाफ़िले रौशन चमकती धूप है, शायद नज़र न आयें तुम्हें ग़मों की धुंध में […]

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T-21/31 तुम्हारी याद के होते हैं जब दिये रौशन-डॉक्टर मुहम्मद आज़म

तुम्हारी याद के होते हैं जब दिये रौशन तभी ग़ज़ल के भी होते हैं मोजज़े रौशन अगरचे बज़्म में हर सू थे क़ुमकुमे रौशन तुम्हारे आने से ये और हो गये रौशन ये कौन गुज़रा है नक़्शे-क़दम हैं ये किस के महक रही है हवा भी, हैं रास्ते रौशन ज़िया में उनकी ही नाम आप […]

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