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T-33/25 बस यही इक विचार करना था. अब्दुल अहद ‘साज़’

बस यही इक विचार करना था
हम को क्यार इख़्तियार करना था

हम कि फ़र्ज़ान-ए-जुनूं ठहरे
ज़ह्न को तार तार करना था
इस गुमां पर हो उस तरफ साहिल
हमको ये दश्त पार करना था

आखि़रेकार कर न पाए हम
वो जो अंजाम-ए-कार करना था

शुअलगी तक था नग़्मगीं का सफ़र
शायरी को शरार करना था

अपनी हिजरत की मसलिहत थी अजब
ग़ैर को यार-ए-ग़ार करना था

नक़्द नाकि़द का मसअला है ‘साज़’
हमको सौदा उधार करना था

अब्दुल अहद ‘साज़’
09833710207

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