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T-32 तरही मिसरा-प्या‍स ऐसी थी कि सहरा को भी दरिया लिक्खा

आइये तरही-32 की जानिब चला जाये। तुफ़ैल साहब ने एक मिसरा सुझाया, ‘प्यास ऐसी थी कि सेहरा को भी दरिया लिक्खा’।
आइये इसे तरह बना कर काविशें की जायें।
मिसरा तरह:- ‘प्या‍स ऐसी थी कि सहरा को भी दरिया लिक्खा’

फ़ाइलातुन फ़यलातुन फ़यलातुन फ़ेलुन ( 2122 1122 1122 22)

क़ाफ़िये:- कि़स्सा, क्या, आधा, पहरा …… ग़रज़े कि अलिफ़ और छोटी हे, दोनों के क़वाफ़ी बरते जा सकते हैं।

30-11-16 तक आपकी ग़ज़लों का इंतिज़ार रहेगा
एक अर्ज़ और … आप हज़रात फोटो फॉर्मेट में ग़ज़लें नहीं भेजकर बराहे-करम टैक्‍स्‍ट फॉर्मेट में ही ख़ाकसार के ई-मेल manojmiital@gmail.com पर भेजने की ज़हमत फ़रमाइये।

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