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T-31/6 कह रही है कुछ ज़बां लेकिन कहानी और है. शरीफ अंसारी

कह रही है कुछ ज़बां लेकिन कहानी और है
बेज़बां की दास्ताान ए जि़न्दगानी और है

हम तेरे बहके हुए बंदों में शामिल हैं मगर
जानते हैं तेरा फ़ज़्ल ए बेकरानी और है

हां वो दीवाना बहुत खामोश रहता है मगर
उसके होंठों पर पयामे जिन्दगानी और है

ऐ दिल ए मुज़्तर न घबरा मुश्किलों के दौर से
सब्र कर दो दिन की इनकी मेहमानी और है

इब्तिदा ही में तरी आंखों में आंसू आ गए
देखते रहना बला ए नागहानी और है

हंस रहा है मेरी गुमनामी पे जो शोहरत पसंद
क्या ख़बर उसको निशान ए बेनिशानी और है

सामने मेरे तेरा चेहरा दमकता देखकर
सब समझ लेंगे कि वजहे शादमानी और है

अब कहां इख़्लास ओ उल्फ़त भाईचारे का चलन
अब यहां पत्थर दिलों की हुक्मरानी और है

उनकी राहों में जो हंसकर जान देते है ‘शरीफ़’
उनके हिस्से में हयात ए जाविदानी और है

शरीफ़ अंसारी
मो.09827965460

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2 comments on “T-31/6 कह रही है कुछ ज़बां लेकिन कहानी और है. शरीफ अंसारी

  1. nishaan e be nishaani ..wahhh
    umda ashaar nikaale haiN
    wahhh

  2. Achchi Ghazal wah wah wah kya kahne umda

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