4 टिप्पणियाँ

T-30/29 जो भी आफ़त है वही उसकी उठाई हुई है. मनोज कुमार मित्त़ल ‘कैफ़’

जो भी आफ़त है वही उसकी उठाई हुई है
रोज़ इस पर ही मिरी दिल से लड़ाई हुई है

आज ही मैंने बदल डाला नज़र का मर्क़ज़
आज ही चांद तिरी जल्वानुमाई हुई है

एक रफ़्तार मुसलसल कहीं ठहराव नहीं
कोई शै ऐसी रग-ए-जां में समाई हुई है

पूछते हो कि कहां नूर की तस्वीर गयी
चांदनी बनके हर इक शै प वो छाई हुई है

आईना सामने रख जमके तमाशा कीजे
अब तबीअत ही तमाशे प’ जो आई हुई है

मुझको तन्हाई मयस्सर ही नहीं होती कभी
भीड़ यादों ने हर इक सिम्त लगाई हुई है

वो जो इक अश्क तिरी दीद का मर्क़ज़ होगा
सारी उम्मीद उसी पर तो टिकाई हुई है

जो भी इल्ज़ाम हों धरने अभी धरते जाओ
मैंने चुप रहने की सौगन्ध उठाई हुई है

यादें रक़्सां हैं कराने को मिरी जान विदा’अ
दिल के ग़मख़ाने में बारात सी आई हुई है

मनोज कुमार मित्त़ल ‘कैफ़’
09887099295

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4 comments on “T-30/29 जो भी आफ़त है वही उसकी उठाई हुई है. मनोज कुमार मित्त़ल ‘कैफ़’

  1. लाजवाब कलाम मनोज साहेब वाहःहः हर शेर उम्दा

  2. आज ही मैंने बदल डाला नज़र का मर्क़ज़
    आज ही चांद तिरी जल्वानुमाई हुई है

    एक रफ़्तार मुसलसल कहीं ठहराव नहीं
    कोई शै ऐसी रग-ए-जां में समाई हुई है
    Lajawab gazal hui sir
    Dili daad qubul kijiye
    Regards
    Imran

  3. जो भी आफ़त है वही उसकी उठाई हुई है
    रोज़ इस पर ही मिरी दिल से लड़ाई हुई है
    Afaat kiski uthai hui hai !! Dil ki ??!! Ya dil Jiske iKhtiyaar me hai uski !! baharhaal sher bahut sunder kaha hai !! aur mushkil sher aasaani se kaha hai matale par Daad !!!

    आज ही मैंने बदल डाला नज़र का मर्क़ज़
    आज ही चांद तिरी जल्वानुमाई हुई है
    Der Aaayad lekin durust aayad !! mubarak ki aapane nazar ka marqaz badal diya !! Aapko Kamal Singh ke do sher sunata hu!! –
    apani hi mastiyon me pursuroor chand tha
    14 dino ki umra ka bharapoor chand tha
    hum hi the kumnazar ki use dekh kab sake
    warna pase naqaab badastoor chand tha -kamal Singh kanpur

    एक रफ़्तार मुसलसल कहीं ठहराव नहीं
    कोई शै ऐसी रग-ए-जां में समाई हुई है
    ye Waqt hai jiski banai hui sarabein hain sb -yahi muslsal hai aur yahi saare badalaav ki root cause bhi hai !! bahut khoob sher !!

    पूछते हो कि कहां नूर की तस्वीर गयी
    चांदनी बनके हर इक शै प वो छाई हुई है
    haan !! sooraj ke zawaaal ke baad kisi na kisi paikar me to roshani numaaya hogi hi !! Roshani lakeeron me qaid nahin ho sakati !!

    आईना सामने रख जमके तमाशा कीजे
    अब तबीअत ही तमाशे प’ जो आई हुई है
    Iske baad tamaasha karane wala khud hi tamasha ban jaayega !!
    sadagi pahachan jiski , khamushi aawaaz hai
    sochiye us aaine se kyon koi naaraaz hai ??!! -mayank

    मुझको तन्हाई मयस्सर ही नहीं होती कभी
    भीड़ यादों ने हर इक सिम्त लगाई हुई है
    sher ki kahan par Daad !! bahut khoob !!!

    वो जो इक अश्क तिरी दीद का मर्क़ज़ होगा
    सारी उम्मीद उसी पर तो टिकाई हुई है
    Ye waqt batayega , main shola hu ya shabanam
    hu ashq abhi khwaab ki palakon pe ruka hu !! -sagar

    जो भी इल्ज़ाम हों धरने अभी धरते जाओ
    मैंने चुप रहने की सौगन्ध उठाई हुई है
    100 ginne talak hi chup rahane ki saugandh khaiyega !!
    sudarshan chakra rakhata hu bazaahir muskuraata hu
    magar Shishupaal teri gaaliyaan bhi gin raha hu main -mayank

    यादें रक़्सां हैं कराने को मिरी जान विदा’अ
    दिल के ग़मख़ाने में बारात सी आई हुई है
    baraat ka manzar bahut khoob liya hai aur baaraat ,vidai , ghamakhane ke janwase me sab kuchh muqammal sher kahane ke liye bakhoobi istemaal kiye gaye hai !!

    zakhmon ki tadada na poochho
    chhota ghar mehamaan bahut hain _ zafar qaleem or someone else !!

    Qaif sahab !! bahut umda sher kahe hain _-tahadaar gahare aur is baar zubaan bhi bahut aasaan rakhi hai aapane -ek bhi mushkil lufz nahin !! is ustadana bayan par poori Daaad !! –mayank

  4. वाह वाह मनोज जी, पूरी ग़ज़ल ही बेहतरीन है | एक से बढ़ कर एक शेर कहे हैं आपने.| जिंदाबाद |
    आज ही मैंने बदल डाला नज़र का मर्क़ज़
    आज ही चांद तिरी जल्वानुमाई हुई है
    आईना सामने रख जमके तमाशा कीजे
    अब तबीअत ही तमाशे प’ जो आई हुई है
    जो भी इल्ज़ाम हों धरने अभी धरते जाओ
    मैंने चुप रहने की सौगन्ध उठाई हुई है

    क्या कहने | बहुत मुबारक हो आपको |
    सत्य चंदन

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