6 टिप्पणियाँ

T-30/28 एक अफ़्वाह बहरलह्जा उड़ाई हुई है. बकुल देव

एक अफ़्वाह बहरलह्जा उड़ाई हुई है
ये जो दुनिया है फ़क़त बात बनाई हुई है

बैठ जाएंगे ज़रा देर में सब गर्द ओ ग़ुबार
आसमानों पे भला किसकी रसाई हुई है

ख़ुश्क़ आंखों में उभर आया है नक़्शा उसका
हमने पानी से जो तस्वीर मिटाई हुई है

इस ख़मोशी में ख़मोशी के अनासिर कम हैं
ये ख़मोशी भी किसी शोर की जाई हुई है

जिसकी तासीर से जीने का गुमां होता रहे
‘कोई शय ऐसी मिरी जां में समाई हुई है’

बकुल देव
09672992110

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6 comments on “T-30/28 एक अफ़्वाह बहरलह्जा उड़ाई हुई है. बकुल देव

  1. वाह उम्दा बहुत खूब ग़ज़ल बकुल साहेब बधाई दाद ही दाद

  2. बैठ जाएंगे ज़रा देर में सब गर्द ओ ग़ुबार
    आसमानों पे भला किसकी रसाई हुई है

    ख़ुश्क़ आंखों में उभर आया है नक़्शा उसका
    हमने पानी से जो तस्वीर मिटाई हुई है

    इस ख़मोशी में ख़मोशी के अनासिर कम हैं
    ये ख़मोशी भी किसी शोर की जाई हुई है

    जिसकी तासीर से जीने का गुमां होता रहे
    ‘कोई शय ऐसी मिरी जां में समाई हुई है’

    बकुल देव साहब आपके शेरों की जितनी भी तारीफ़ की जाये कम है ।बहुत मुबारक

  3. ख़ुश्क़ आंखों में उभर आया है नक़्शा उसका
    हमने पानी से जो तस्वीर मिटाई हुई है
    Lajawab gazal hui sir
    Dili daad qubul kijiye
    Regards
    Imran

  4. एक अफ़्वाह बहरलह्जा उड़ाई हुई है
    ये जो दुनिया है फ़क़त बात बनाई हुई है
    Philosophy ke basics ko reconstruct kurana padega !! Duniya subject to Time hai aur Time and space eternal entities hain isliye hum falsafe ko wahan se aqeeda bana lete hain jahan se ahasaas fana hone lagata hai !! lekin agar ye kaha jaaye ki ye एक अफ़्वाह बहरलह्जा उड़ाई हुई है… to sare manualas fir likhe jaayeinge !! sher par daad !!

    बैठ जाएंगे ज़रा देर में सब गर्द ओ ग़ुबार
    आसमानों पे भला किसकी रसाई हुई है
    bahut sunder !! bulandi der tak kis shakhs ke hisse me rahati hai ??!! aur Ghard o gubaar par to isi yaqeen par ek sher maine bhi kaha hai isi tarahi me —
    main bagoola tha , na hota , wahi behatar hota
    mere hone ne mujhe dhool chatai hui hai –mayank

    ख़ुश्क़ आंखों में उभर आया है नक़्शा उसका
    हमने पानी से जो तस्वीर मिटाई हुई है
    Id sher par saikadon Daad !! zabt kiye huye ashqon ka zarf is sher me behad khoobsoorati se ubhara gaya hai !!!

    इस ख़मोशी में ख़मोशी के अनासिर कम हैं
    ये ख़मोशी भी किसी शोर की जाई हुई है
    do khamoshiyaan hoti hai ek baagh e rizwaan ki aur ek maraghat ki –doosari khamoshi ko behatareen paikar diya gaya hai sher me !!

    जिसकी तासीर से जीने का गुमां होता रहे
    ‘कोई शय ऐसी मिरी जां में समाई हुई है’
    wah wah !!! ise hi jijeeevisha kahate hain

    Bakul bhai !! Kum sher kahe aapane lekin jo kahe bahut khoob kahe wah wah!!

  5. बकुल भाई क्या कहने | कम शेर लेकिन नायाब, लाजवाब शेर| बहुत खूब |

    बैठ जाएंगे ज़रा देर में सब गर्द ओ ग़ुबार
    आसमानों पे भला किसकी रसाई हुई है

    ख़ुश्क़ आंखों में उभर आया है नक़्शा उसका
    हमने पानी से जो तस्वीर मिटाई हुई है

    इस ख़मोशी में ख़मोशी के अनासिर कम हैं
    ये ख़मोशी भी किसी शोर की जाई हुई है

    बहुत मुबारक हो आपको |

  6. क्या कहने बकुल देव साहब
    बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है
    छोटी लेकिन पुरअसर
    तीसरे और चौथे शेर पर ख़ास तौर से दाद

    दिली मुबारकबाद

    आलोक

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