2 टिप्पणियाँ

T-30/20 इश्क़ में हम ने भी इक उम्र गंवाई हुई है. डॉ आज़म

इश्क़ में हम ने भी इक उम्र गंवाई हुई है
हां मगर जो है गंवाई वही पाई हुई है

रूह तक किस की निगाहों की रसाई हुई है
जो हुई है वो फ़क़त जिस्म नुमाई हुई है

ऐ असीरो इसे अब अपना मुक़द्दर जानो
पंज ए ग़म से भला किस की रिहाई हुई है

दोस्ती को भी निभाना नहीं आसां अब तो
मस्लहत कोश तरीक़ों से निभाई हुई है

सब्ज़ कर देगी ये सहरा भी हमारे दिल का
हम ने बारिश से ये उम्मीद लगाई हुई है

तेरी यादों के तसुलसुल से नहीं छुटकारा
एक अभी याद गयी एक फिर आई हुई है

पहले थे चंद मरीज़ाने ग़ज़ल गोई मगर
अब ग़ज़ल कहने की बीमारी वबाई हुई है

डॉ आज़म
09827531331

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2 comments on “T-30/20 इश्क़ में हम ने भी इक उम्र गंवाई हुई है. डॉ आज़म

  1. इश्क़ में हम ने भी इक उम्र गंवाई हुई है
    हां मगर जो है गंवाई वही पाई हुई है
    ishq me jo umra rayagaan hui wo hi ishq kaa hasil bhi hai !! Wah wah !! jaise paidal chalane se health banti hai aur wo health paidal chalane ke hi kaam bhi aati hai !! Azam sahab matala khoob( soorat ) hai !!!

    रूह तक किस की निगाहों की रसाई हुई है
    जो हुई है वो फ़क़त जिस्म नुमाई हुई है
    hur koi ahale nazar to nahin ho sakta isliye rooh talak sabaka ahasaas kaise ja sakata hai !! Jism ki harakatein rooh ke rang ki Indicator hoti hain !! sher par daad !!

    ऐ असीरो इसे अब अपना मुक़द्दर जानो
    पंज ए ग़म से भला किस की रिहाई हुई है
    waise panj e gham se rihai ki talab kum se kum shairon ko to nahin honi chahiye kyonki jigar sahab kah gaye —
    dil gaya raunak e hayat gai
    gham gaya saari kainaat gayi -jigar

    दोस्ती को भी निभाना नहीं आसां अब तो
    मस्लहत कोश तरीक़ों से निभाई हुई है
    dosti! to sabase complex lufz hai aur ise nibhana sabase kathin marahale ko sur karne jaisa hai !! khob kaha sher aapane !!

    सब्ज़ कर देगी ये सहरा भी हमारे दिल का
    हम ने बारिश से ये उम्मीद लगाई हुई है
    umeed pe duniya kaim hai !! waise baarish ka ek collusion hai dhoop ke saath !! ye dono noora kushti dikhate hain aur hame dono hi barbaad kiye hain !! sookha rahat kosh aur baadha aapada kosh ko manage kurne wale hi kuchh faayede me rahate hain

    तेरी यादों के तसुलसुल से नहीं छुटकारा
    एक अभी याद गयी एक फिर आई हुई है
    sher me lahar hai aur rawani hai !!

    पहले थे चंद मरीज़ाने ग़ज़ल गोई मगर
    अब ग़ज़ल कहने की बीमारी वबाई हुई है
    ghazal ki khair nahin ,, hur koi hai shayar ab
    ki shaharaah ko laundon ne rahe aam kiya -mayank

    ustadana peshakash par tader Daad aur taliyaan –mayank

  2. वाहःहः वाहःहः डॉ आज़म साहेब लाजवाब कलाम बधाई

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