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T-30/19 जिसके ख्वाबों ने मिरी नींद उड़ाई हुई है. सत्य चन्दन

जिसके ख्वाबों ने मिरी नींद उड़ाई हुई है
बस उसी शख्स से ये बात छिपायी हुई है

अब मिरे बस में सफ़र है न सफ़र की मंज़िल
ज़िन्दगी इश्क़ के हाथों में थमाई हुई है

तुझको पाने के लिए करता हूँ वो भी सब कुछ
जिस भी पंडित ने जो तरकीब बताई हुई है

मुझको दुनिया का किसी तौर न होने देगी
“एक शय ऐसी मिरी जां में समायी हुई है”

जानता हूँ मैं बड़ेपन की हक़ीक़त सारी
दोस्ती मैंने समंदर से निभायी हुई है

खर्च तो खूब हुआ हूँ मैं बिछड़ कर तुझसे
तेरे हिस्से की मगर ज़ीस्त बचायी हुई है

बारिश ए ग़म से नहीं हूँ मैं बिखरने वाला
मैंने मिटटी को बहुत धूप दिखाई हुई है

मेरे होठों प धरी प्यास सबब है इसका
जो भी शोहरत तिरी आँखों ने कमाई हुई है

बाज़ी ए इश्क भला छोड़ के अब कैसे उठूँ
ज़ीस्त ही दांव पे जब मैंने लगायी हुई है

सत्य चन्दन
9414688789

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6 comments on “T-30/19 जिसके ख्वाबों ने मिरी नींद उड़ाई हुई है. सत्य चन्दन

  1. मुझको दुनिया का किसी तौर न होने देगी
    “एक शय ऐसी मिरी जां में समायी हुई है”
    ye shay ana ya khuddari hai wah wah !!

    जानता हूँ मैं बड़ेपन की हक़ीक़त सारी
    दोस्ती मैंने समंदर से निभायी हुई है
    achchha sher hai !!

    खर्च तो खूब हुआ हूँ मैं बिछड़ कर तुझसे
    तेरे हिस्से की मगर ज़ीस्त बचायी हुई है
    oola misre ki gadhan par daad !! sher par bhi daaad !!

    बारिश ए ग़म से नहीं हूँ मैं बिखरने वाला
    मैंने मिटटी को बहुत धूप दिखाई हुई है
    saani misre par extra Daad !! sher par bhi Daad !!

    मेरे होठों प धरी प्यास सबब है इसका
    जो भी शोहरत तिरी आँखों ने कमाई हुई है
    kisi ke avasaan me kisi ka arrooz chhupa hai –abshaar jo hai wo kisi kuhasaar ke ashq hote hain jinhe pee kur samander ka saramaaya mahafooz rahata hai –aisi hi baat !!
    Satya Chandan ji bahut khoob kyaa sher kahe hain !! Daad !! -mayank

  2. खर्च तो खूब हुआ हूँ मैं बिछड़ कर तुझसे
    तेरे हिस्से की मगर ज़ीस्त बचायी हुई है

    बारिश ए ग़म से नहीं हूँ मैं बिखरने वाला
    मैंने मिटटी को बहुत धूप दिखाई हुई है

    बहुत ख़ूब चंदन भाई….कमाल के अशआर…वाह..

    दिली दाद क़ुबूल कीजिये.

    • दिल से शुक्रगुजार हूँ बकुल भाई हौसला बढ़ाने के लिए |

  3. लाजवाब ग़ज़ल सत्य चन्दन साहेब सारे आशार बहुत बहुत उम्दा खास तौर पर मैंने मिटटी को बहुत धूप दिखाई हुई है waahhhhhhhhhhhh

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