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T-30/13 दीन-ओ-दुनिया से तो हर चंद लड़ाई हुई है. ‘असरार’ किठौरी

दीन-ओ-दुनिया से तो हर चंद लड़ाई हुई है
जि़न्दगी तुझसे मगर बात बनाई हुई है

चार दिन हमको भी दे देते बुझाने के लिये
तुमने ये आग जो सदियों से लगाई हुई है

क़ब्ल अज़ अादम हव्वा ये ज़मीं थी जन्नत
इब्न-ए-आदम ने जहन्नुम जो बनाई हुई है

अपने बाहर तो दिखाई नहीं देता कुछ भी
रौशनी कब से मेरी मुझमें समाई हुई है

अब वो पहली सी नहीं है मेरे सीने में तड़प
अक़्ल, अब दिल को ये लगता है कि आई हुई है

आप भी पास जरा हुस्न का अपने रखिये
तुहमत-ए-इश्क‍ बहुत हमने उठाई हुई है

ये भी कुछ कम तो नहीं है कि बराए-मरहम
एक एक ज़ख़्म की सौ बार गिनाई हुई है

मुस्तहक़ हम भी इनायात के ठहरे कि नहीं
हां में हां आपकी मुद्दत से मिलाई हुई है

जब उजालों की जगह घर में अंधेरे उमड़े
वो दीवाली भी कई बार मनाई हुई है

ख़्वाहिश-ए-दाद है लोगों से कि उम्मीद-ए-करम
दिल की हर चोट जो चेहरे पे सजाई हुई है

इसको मांगे का उजाला नहीं कहते ‘असरार’
शम्अ से शम्अ अगर हमने जलाई हुई है

‘असरार’ किठौरी
09410274896

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