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T-30/6 ज़िन्दगी तू मुझे लेकर कहाँ आई हुई है “समर कबीर”

ज़िन्दगी तू मुझे लेकर कहाँ आई हुई है
लाश हर एक ने काँधे पे उठाई हुई है

ऐसे आमाल से जन्नत नहीं मिलती भाई
उलटी पट्टी ये तुम्हें किसने पढ़ाई हुई है

सब तमाशाई बने देख रहे हैं मंज़र
बेगुनाहों पे क़यामत वहाँ ढाई हुई है

ज़िद पे आ जाये तो दुनिया तहो बाला करदे
एक औरत जो ज़माने की सताई हुई है

ज़िन्दगी में तो हमें शह न कोई दे पाया
मात हमने मियाँ तक़दीर से खाई हुई है

मेरी मज़दूरी के पैसे मुझे दे दो मालिक
आज बेटी मिरी ससुराल से आई हुई है

मुतमइन हूँ मैं “समर” ख़ुद से बक़ौल-ए-‘दुष्यंत’
मैंने इक आग तो सीने में जलाई हुई है

“समर कबीर”
09753845522

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7 comments on “T-30/6 ज़िन्दगी तू मुझे लेकर कहाँ आई हुई है “समर कबीर”

  1. क्या खूब asshaar हुए हैं इस ग़ज़ल के भी वाहःहः समर साहेब लाजवाब no words

  2. ऐसे आमाल से जन्नत नहीं मिलती भाई
    उलटी पट्टी ये तुम्हें किसने पढ़ाई हुई है

    सब तमाशाई बने देख रहे हैं मंज़र
    बेगुनाहों पे क़यामत वहाँ ढाई हुई है

    ज़िद पे आ जाये तो दुनिया तहो बाला करदे
    एक औरत जो ज़माने की सताई हुई है

    वाहह जनाब समर कबीर साहब वैसे तो पूरी ग़ज़ल अच्छी है मगर खासतौर पर ये अशआर तो बहुत पसंद आए। दिली दाद हाज़िर है।

  3. वाह समर कबीर साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है ।मुबारक

  4. समर कबीर साहब !! आप मुसव्विर भी हैं !! – वली भी !! दीदावर भी और कारी भी और मुगन्नी भी –ये मैं नहीं कह रहा आपकी ग़ज़ल कह रही है !! इतने पारदर्शी और ईमानदार शेर आप ही कह सकते हैं !! और लहजे का तो कहना ही क्या जैसे कोई साथ बैठ कर गुफ्तगू कर रहा हो !! सैकडो दाद इस ग़ज़ल पर –मयंक

  5. ऐसे आमाल से जन्नत नहीं मिलती भाई
    उलटी पट्टी ये तुम्हें किसने पढ़ाई हुई है
    bhai kya baat hai… waah…

    ज़िद पे आ जाये तो दुनिया तहो बाला करदे
    एक औरत जो ज़माने की सताई हुई है
    wah wah wah

    मेरी मज़दूरी के पैसे मुझे दे दो मालिक
    आज बेटी मिरी ससुराल से आई हुई है
    kya achcha sher… waah

    Samar Kabeer sahab kya achche ashaar padhne ko mile aapki gazal mein… mubarakbaad

  6. समर साहब इस शेर पर जितनी दाद दी जाये कम है। गज़ब का शेर ,बला का शेर, ज़िंदाबाद, मरहबा

    मेरी मज़दूरी के पैसे मुझे दे दो मालिक
    आज बेटी मिरी ससुराल से आई हुई है

  7. Lajawab bakamal Ghazal BAHUT umda

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