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T-30/4 अपने प्रियतम से लगन ऐसी लगाई हुई है-चंद्रभान भारद्वाज

अपने प्रियतम से लगन ऐसी लगाई हुई है
उसकी तसवीर निगाहों में बनाई हुई है

उसकी हर याद लहू बन के बहे रग रग में
एक साया सी मेरी जाँ में समाई हुई है

उसके आने की भनक जब से लगी है दिल को
चाँद तारों से नई दुनिया सजाई हुई है

आह आँसू कि सिसकियों के सिवा कुछ न बचा
प्यार में पूँजी यही हमने कमाई हुई है

चाहतें रोई मगर आँख से आँसू न बहे
मन कहीं और कहीं और सगाई हुई है

उनकी बरसात तो आई है बहारें लेकर
हर घटा अपनी हवाओं ने उड़ाई हुई है

एक इल्ज़ाम नया फिर से लगाया हम पर
पहले इल्ज़ाम से जब अपनी रिहाई हुई है

जो बुझाने में लगे आग अभी दिल में लगी
तीली ज़ज्बात में उनकी ही लगाई हुई है

नाज़ नखरों से ‘भरद्वाज’ जिसे पाला था
जब सयानी हुई बिटिया तो पराई हुई है

चंद्रभान भारद्वाज 09826025016

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6 comments on “T-30/4 अपने प्रियतम से लगन ऐसी लगाई हुई है-चंद्रभान भारद्वाज

  1. खूबसूरत मकता सहित सुन्दर आशार चन्द्रभानु साहेब लाजवाब ग़ज़ल हुई मुबारकबाद कबूल करें

  2. वाह भारद्वाज साहब बेहतरीन, खासतौर पाँचवा शे’र और मक्ता कमाल का हुआ है।

  3. पहले और आज के बयान में फर्क है या मुझे ही महसूस हो रहा है !! भारद्वाज साहब !! बहुत मेच्योर बयान है इस ग़ज़ल का !! लेकिन काबिले सत्ताइश बात ये है कि आपके निजत्व का इख्तियार अभी भी बना हुआ है ग़ज़ल पर जो कि बहुत महत्वपूर्ण है !! य़े ग़ज़ल कथ्य और शिल्प की दृष्टि से बहुत सुन्दर कही है !! जैसे ये शेर अपनी मौलिकता के कारन बेहद भा रहे हैं !!
    चाहतें रोई मगर आँख से आँसू न बहे
    मन कहीं और कहीं और सगाई हुई है
    नाज़ नखरों से ‘भरद्वाज’ जिसे पाला था
    जब सयानी हुई बिटिया तो पराई हुई है
    बहुत बहुत मुबारक आपको चन्द्रभान भारद्वाज साहब !! वाह वाह !!—मयंक

  4.   , 1$

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  5. चन्द्रभान भरद्वाज साहब का लहजा ग़ज़ल के तईं मुब्तदी का सा है और उनमें उसी तरह का जोश भी है। हर तरही को वो अपने कलाम से नवाज़ते भी हैं। इस कविश में कई मर्तबा कोई सुक़म भी साथ चला आता है मगर ये बात क़ाबिले-सताइश है कि वो लगातार अपने को संवारते चले जा रहे हैं। मुहतरम चन्द्रभान भरद्वाज साहब ग़ज़ल के लिये बहुत बहुत आभार

  6. जनाब भारद्वाज साहिब ,अच्छे अशआर निकाले हैं आपने इस ज़मीन में,मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं।

    “आह आँसू कि सिसकियों के सिवा कुछ न बचा
    प्यार में पूँजी यही हमने कमाई हुई है”

    इस शैर के ऊला मिसरे पर ग़ौर कीजियेगा ।

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