8 टिप्पणियाँ

T-30/1 सारी दुनिया से अभी तक तो छुपाई हुई है-समर कबीर

सारी दुनिया से अभी तक तो छुपाई हुई है
मेरी आँखों में जो तस्वीर समाई हुई है

हम सिखा देंगे तुम्हें पैच लड़ाने का हुनर
हमने बचपन में पतंग ख़ूब उड़ाई हुई है

मन की आँखे ज़रा खोलो तो दिखाई देगी
उसने जन्नत इसी दुनिया में बसाई हुई है

आप तो अम्न का पर्चम लिये फिरते थे,कहो
किस लिये हाथ में तलवार उठाई हुई है

ख़्वाब में भी तुझे पत्थर ही दिखाई देंगे
तूने शीशे की हवेली जो बनाई हुई है

मुझसे मिलना भी गवारा नहीं उसको लेकिन
मेरी तस्वीर भी कमरे में लगाई हुई है

थोड़ा सोचोगे “समर” ख़ुद ही समझ जाओगे
आग नफ़रत की यहाँ किस की लगाई हुई है

समर कबीर                  09753845522

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8 comments on “T-30/1 सारी दुनिया से अभी तक तो छुपाई हुई है-समर कबीर

  1. कमाल waahhhhh समर साहेब खूबसूरत अशआर
    तूने शीशे की हवेली जो बनायी हुई है वाह

  2. मोहतरम जनाब समर साहब बड़ी खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, तहे दिल से बधाई आपको

  3. ख़्वाब में भी तुझे पत्थर ही दिखाई देंगे
    तूने शीशे की हवेली जो बनाई हुई है!!! वाह! बहुत ख़ूब समर कबीर साहब!

  4. लफ़्ज़ की तीसवीं तरही की शाख़ पर पहला फूल खिला और क्या ख़ूब खिला। समर कबीर साहब कुहना-मश्क़ शायर हैं और ज़ाहिर है पुराने चावल दूर से महकते हैं। हर शेर अच्छा कहा, पूरी ग़ज़ल भरपूर कही। मुहतरम सैकड़ों दाद क़ुबूल फ़रमाइये।

  5. सारी दुनिया से अभी तक तो छुपाई हुई है
    मेरी आँखों में जो तस्वीर समाई हुई है
    बाकमाल गजल काही है समर साहब !!! मतला क्या खूब !! कितना खूबसूरत शेर है !! इंसानी सीरिश्त के एक आशना पहलू का नुमाइंदा है ये शेर !!!
    ख़्वाब में भी तुझे पत्थर ही दिखाई देंगे
    तूने शीशे की हवेली जो बनाई हुई है
    इस शेर पर सैकड़ो दाद !! क्या तसव्वुर है और कितना जानदार शेर कहा है वाह वाह !!
    मुझसे मिलना भी गवारा नहीं उसको लेकिन
    मेरी तस्वीर भी कमरे में लगाई हुई है
    ये भी मुहब्बत का एक पोशीदा रंग है जिसे खूब समझा जाना जाता है !!
    दीगर आशआर भी तस्लीम !!! इस तरही का सुंदर आगाज हुआ है !! –मयंक

  6. मन की आँखे ज़रा खोलो तो दिखाई देगी
    उसने जन्नत इसी दुनिया में बसाई हुई है
    ख़्वाब में भी तुझे पत्थर ही दिखाई देंगे
    तूने शीशे की हवेली जो बनाई हुई है
    Smeer sahab kya khub gazal hui hai, in ishhar pe to khaas mubarak baad .

  7. हम सिखा देंगे तुम्हें पैच लड़ाने का हुनर
    हमने बचपन में पतंग ख़ूब उड़ाई हुई है

    ख़्वाब में भी तुझे पत्थर ही दिखाई देंगे
    तूने शीशे की हवेली जो बनाई हुई है

    वाह, बहुत ख़ूब ।

  8. आप तो अम्न का पर्चम लिये फिरते थे,कहो
    किस लिये हाथ में तलवार उठाई हुई है

    ख़्वाब में भी तुझे पत्थर ही दिखाई देंगे
    तूने शीशे की हवेली जो बनाई हुई है

    मुझसे मिलना भी गवारा नहीं उसको लेकिन
    मेरी तस्वीर भी कमरे में लगाई हुई है

    थोड़ा सोचोगे “समर” ख़ुद ही समझ जाओगे
    आग नफ़रत की यहाँ किस की लगाई हुई है
    वाहःहः क्या कहने समर साहेब कमाल के ashhar

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