2 टिप्पणियाँ

पानी आंख में भर के लाया जा सकता है-अब्बास ‘ताबिश’

पानी आंख में भर के लाया जा सकता है
अब भी जलता शह्र बचाया जा सकता है

एक मुहब्बत और वो भी नाकाम मुहब्बत
लेकिन इससे काम चलाया जा सकता है

दिल पर पानी पीने आती हैं उम्मीदें
इस चश्मे में ज़ह्र मिलाया जा सकता है

मुझ गुमनाम से पूछते हैं फ़रहादो-मजनूं
इश्क़ में कितना नाम कमाया जा सकता है

ये महताब ,ये रात की पेशानी का घाव
ऐसा ज़ख़्म तो दिल पर खाया जा सकता है

फटा पुराना ख़ाब है मेरा फिर भी ‘’ताबिश ‘’
इसमें अपना आप छुपाया जा सकता है

अब्बास ‘ताबिश’

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2 comments on “पानी आंख में भर के लाया जा सकता है-अब्बास ‘ताबिश’

  1. जज़्बात मे सबको ही डुबोया जा सकता है
    ऐसे ही नफ़रत को मिटाया जा सकता है

  2. क्या बात है गज़ब

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