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बारवर किसके लिए किसकी दुआ हो गयी है-सऊद उस्मानी

बारवर किसके लिए किसकी दुआ हो गयी है
मैं हवा हूँ कि ये ज़ंजीर रिहा हो गयी है

ग़ार में सोये हुओं को ये भला क्या मालूम
वही दुनिया इसी इक नींद में क्या हो गयी है

ख़्वाहिशे-तर्क बतानी तो नहीं थी लेकिन
अब मैं क़ायम हूँ अगर मुझसे ख़ता हो गयी है

राख से फूटती कोंपल को तो देखो कि ये बात
कितनी दुश्वार थी और कैसे अदा हो गयी है

वरना यूँ कौन चमक सकता है दिल की सूरत
आईने तुझपे कोई ख़ास अता हो गयी है

उससे बिछड़ा हूँ तो इक लफ़्ज़ की सूरत हूँ ‘सऊद’
और इस लफ़्ज़ से तासीर जुदा हो गयी है

सऊद उस्मानी

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One comment on “बारवर किसके लिए किसकी दुआ हो गयी है-सऊद उस्मानी

  1. ग़ार में सोये हुओं को ये भला क्या मालूम
    वही दुनिया इसी इक नींद में क्या हो गयी है

    राख से फूटती कोंपल को तो देखो कि ये बात
    कितनी दुश्वार थी और कैसे अदा हो गयी है
    Waah waah usmaani sahab kya achche ash’aar hue hein. Dheron daad
    Sadar
    Pooja

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