6 टिप्पणियाँ

मैं धीमा राग हूं भाता है ये उतार मुझे-स्वप्निल तिवारी

मैं धीमा राग हूं भाता है ये उतार मुझे
सदा की ओट में आ ख़ामुशी पुकार मुझे

घुमाता है जो लड़कपन का रेगज़ार मुझे
उठाये फिरता है काँधे पे इक ग़ुबार मुझे

न तैरना ही बने और न डूब ही पाऊं
हर एक मौज किये जाय दरकिनार मुझे

कुछ ऐसा दर्द है जी चाहता है तेरी याद
वो धुन बजाये करे अब जो तार तार मुझे

नहीं है दूसरी गाड़ी कोई भी तेरे बाद
यूँ बीच नींद में ऐ ख़्वाब मत उतार मुझे

ज़रा ख़याल भर आता है एक शै का और
दबोच लेते हैं फिर उस के इश्तेहार मुझे

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

6 comments on “मैं धीमा राग हूं भाता है ये उतार मुझे-स्वप्निल तिवारी

  1. मेरी जान अब अाप वाह वाह से परे जा निकले। कहां तक तारीफ़ की जाये। अगर हम अपकी पोस्ट पे न भी दिखें तो हमारी वाह वाह मान लिया कीजिए। ख़ामुशी के साथ यह जुड़वां-इनबिल्ट है।

  2. लअज़वाब अशआर स्वप्निल साहेब
    यूँ बीच नींद में ए ख्वाब मत उतार मुझे वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् कायल हो गयी मै तो

  3. वाह खूब वाह ………….. बहुत खूब ग़ज़ल हुई है ……………..

  4. नहीं है दूसरी गाड़ी कोई भी तेरे बाद
    यूँ बीच नींद में ऐ ख़्वाब मत उतार मुझे
    Kya kahne dada
    Wahhhhhhh

  5. वाह स्वप्निल जी

    बहुत प्यारी ग़ज़ल हुई है

    न तैरना ही बने और न डूब ही पाऊं
    हर एक मौज किये जाय दरकिनार मुझे

    क्या बात है साहब
    नकुल गौतम

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: