5 Comments

शब, उदासी, अलाव क्या कहने-इरशाद ख़ान सिकंदर

शब, उदासी, अलाव क्या कहने
दिल! यूँ मूँछों पे ताव क्या कहने

मसअला, मसअले से हल होगा
मोहतरम के सुझाव क्या कहने

हिज्र के दाँत हो गए खट्टे
इश्क़ के हाव भाव क्या कहने

हर घड़ी मुझपे हाथ शफ़क़त का
ज़ख़्म के रख रखाव क्या क्या कहने

इक समंदर ने ये कहा आकर
हम हैं काग़ज़ की नाव क्या कहने

दिल की शैतानियों पे हर लम्हा
आलिमाना दबाव क्या कहने

उनकी जानिब से हुक्म आया है
कल हमारे घर आव क्या कहने

दिल की जानिब से जानिबे सहरा
इक धनक सा खिंचाव क्या कहने

इरशाद ख़ान सिकंदर 9818354784

Advertisements

About irshadkhansikandar

मैं मूलतः शायर हूँ . हाँ रोज़ी-रोटी के लिए फिल्म,धारावाहिक,म्युज़िक एल्बम में गीत लिखता हूँ

5 comments on “शब, उदासी, अलाव क्या कहने-इरशाद ख़ान सिकंदर

  1. वाह वाह खूब वाह ………………..

  2. irshad bhai… kya kahne… is ghazal pe to yahi kaha jaa sakta hai..zindabaad

  3. मसअला, मसअले से हल होगा
    मोहतरम के सुझाव क्या कहने
    Wahhhhhhh dada
    Lajawab

  4. ज़बान का ज़बरदस्त काम। किसी भी ज़मीन में कैसे फूल खिलाये जाते हैं, ये कोई आपसे सीखे। वाह वाह

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: