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घर में ग़ुरबत भी हो बिटिया भी सयानी हो तो- इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’

देखिये हश्र अगर आग बुझानी हो तो
रोकिये ख़ुद को ज़रा आँख में पानी हो तो


मैं बड़े बूढ़ों के एहसास समझ सकता हूँ
घर में ग़ुरबत भी हो बिटिया भी सयानी हो तो


ये बताओ कि बुरा सा तो नहीं मानोगे
हमसे हर बार यही सादाबयानी हो तो


मैं समझता हूँ तुझे अपना,बता दीजो गर
तेरी नज़रों में कोई और मआनी हो तो


हमसे दीवानों की वहशत को  समझ पाए अगर
ख़ाक सहराओं की तूने कभी छानी हो तो


अपने क़िस्से तो पुराने हैं सुनायें साहब
आपके पास कोई ताज़ा कहानी हो तो


जो हमारे ही मियाँ ख़ून का प्यासा होवे
सोचिये उसकी अगर जान बचानी हो तो


अपने बारे में फ़क़त इतना बता दूँ ऐ दोस्त
मेरे मुँह लगना तुम्हें मुँह की ही खानी हो तो


पहली फ़ुरसत में मिरे पास उसे भेजो तुम
ख़ाक में आग जो नफ़रत की मिलानी हो तो

इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’                              09818354784

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About irshadkhansikandar

मैं मूलतः शायर हूँ . हाँ रोज़ी-रोटी के लिए फिल्म,धारावाहिक,म्युज़िक एल्बम में गीत लिखता हूँ

8 comments on “घर में ग़ुरबत भी हो बिटिया भी सयानी हो तो- इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’

  1. हाय क्या जानलेवा शेर कहा है। ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद मरहबा मरहबा आफ़रीं आफ़रीं

    जो हमारे ही मियाँ ख़ून का प्यासा होवे
    सोचिये उसकी अगर जान बचानी हो तो

  2. मुश्किल काफ़िये मे कही गई बेहतरीन ग़ज़ल

  3. Dusri gazal bhi lajawab dada
    Ek baar fir dili daad

  4. Vaah vaah

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