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T-29/56 दिल ने दरयाफ़्त कर लिया है मुझे-ज़ुल्फ़िक़ार ‘आदिल’

साहिबो, तरही 6 मई को ख़त्म हो चुकी। 8 मई यानी दो दिन बाद पोस्ट करना मेरी ग़लती है। ये गज़ल इस तरही मिसरे के शायर ज़ुल्फ़िक़ार आदिल साहब ने मुझे whatsapp से भेजी। मैं देखना ही भूल गया। इसकी सज़ा शायर को नहीं मिलनी चाहिये इसलिये आपकी नाराज़गी मेरे सर मगर ग़ज़ल तो पोस्ट करनी पड़ेगी। तुफ़ैल चतुर्वेदी

दिल ने दरयाफ़्त कर लिया है मुझे
‘अपने अंजाम का पता है मुझे’

वो चुरा कर किसी ख़ज़ाने से
रास्ते में गिरा गया है मुझे

नींद गहरी है रात काली है
ख़ाब क्यूँ ख़ाब लग रहा है मुझे

भीड़ में हाथ छोड़ कर उसने
इक मुअम्मा बन दिया है मुझे

ज़िन्दगी सीख लूँ तो अच्छा है
वैसे मरना तो आ गया है मुझे

मैं कहीं भी ठहर नहीं सकता
वो परीज़ाद जानता है मुझे

दिल में लाहौर भी है दिल्ली भी
हिज्र लाहक़ तो हर जगह है मुझे

ज़ुल्फ़िक़ार ‘आदिल’ whatsapp नंबर 00923343701401 कॉल नंबर 00923101143380

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5 comments on “T-29/56 दिल ने दरयाफ़्त कर लिया है मुझे-ज़ुल्फ़िक़ार ‘आदिल’

  1. AADIL BHAI !! KAMAL KI GHAZAL EK BAAR FIR !! AAPKE MISRON KO SALLAM KUR RAHA HUN –
    दिल ने दरयाफ़्त कर लिया है मुझे
    ‘अपने अंजाम का पता है मुझे’
    AB MAIN MULZIM HUN AUR MUNSIF BHI
    DIL NE DARYAFT KUR LIYA HAI MUJHE
    वो चुरा कर किसी ख़ज़ाने से
    रास्ते में गिरा गया है मुझे
    ASHQ THA NATAWAAN KI AANKHON KA
    RAASTE ME GIRA GAYA HAI MUJHE
    नींद गहरी है रात काली है
    ख़ाब क्यूँ ख़ाब लग रहा है मुझे
    CHAND UTANA HI DOOR HAI AB TAK
    KHWAB KYON KHWAB LAG RAHA HAI MUJHE
    भीड़ में हाथ छोड़ कर उसने
    इक मुअम्मा बन दिया है मुझे
    ISHQ NE TERE, HIJRA NE TERE
    IK MUAMMA BANA DIYA HAI MUJHE
    ज़िन्दगी सीख लूँ तो अच्छा है
    वैसे मरना तो आ गया है मुझे
    ZINDAGI !! TERI QATLAGAHON ME
    WAISE MARNA TO AA GYA HAI MUJHE
    मैं कहीं भी ठहर नहीं सकता
    वो परीज़ाद जानता है मुझे
    MUJHKO AB BHI GUMAN HAI, SHAYAD
    WO PARIZAD JANATA HAI MUJHE
    दिल में लाहौर भी है दिल्ली भी
    हिज्र लाहक़ तो हर जगह है मुझे
    DASHT JAISI HAI ZINDAGI MERI
    HIJRA LA HAQ TO HUR JAGAH HAI MUJHE
    AAGE BHI APAKI SAKHT ZAROORAT RAHEGI YAHAN – REGARDS –MAYANK

  2. वो चुरा कर किसी ख़ज़ाने से
    रास्ते में गिरा गया है मुझे

    भीड़ में हाथ छोड़ कर उसने
    इक मुअम्मा बन दिया है मुझे

    wahg wah wah… adil sahab in ashaar par dheron mubarakbaad… is tarahi nashist mein nageene hain… wah wa… mubaarak

  3. भीड़ में हाथ छोड़ कर उसने
    इक मुअम्मा बन दिया है मुझे
    वाह वाह आदिल साहब।

  4. ज़ुल्फ़िक़ार आदिल साहब, ज़िंदाबाद। हर शेर कमाल का, ज़बान की वो चाशनी जो पाकिस्तान की शायरी से ग़ायब होती जा रही है। पुख़्ता ग़ज़ल के लिये हज़ारों दाद क़ुबूल फ़रमाइये

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