18 टिप्पणियाँ

T-29/54 ज़िन्दगी से तो और क्या है मुझे-इमरान हुसैन ‘आज़ाद’

ज़िन्दगी से तो और क्या है मुझे
बस ज़रा वक़्त काटना है मुझे

तुझको देखा तो ये लगा है मुझे
इश्क़ सदियों से जानता है मुझे

आशना सड़कें, अजनबी चेहरे
शह्र में और क्या दिखा है मुझे

लोग क़ीमत मिरी लगाते हैं
किस जगह तूने रख दिया है मुझे

सुब्ह रुख़्सत करे मकाँ मेरा
शाम को ख़ुद ही ढूँढता है मुझे

मेरे शेरों पे वाह वा हो जब
आपका चेहरा देखना है मुझे

रतजगो! तुम ही कुछ बताओ अब
इश्क़ तो है ही, और क्या है मुझे

मैं भी क्या दूसरों के जैसा हूँ
ख़ुद को बाहर से देखना है मुझे

बात सच है मगर कहूँ कैसे
तिशनगी ने डुबो दिया है मुझे

मौज दर मौज मिट रहा हूँ मैं
कौन साहिल पे लिख गया है मुझे

किसलिए रोज़ जाग जाता हूँ
कौन है जिसका डर लगा है मुझे

इमरान हुसैन ‘आज़ाद’ 09536816624

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18 comments on “T-29/54 ज़िन्दगी से तो और क्या है मुझे-इमरान हुसैन ‘आज़ाद’

  1. इमरान साहब बेहद खूबसूरत ग़ज़ल हुई है।

    मौज़ दर मौज़ मिट रहा हूँ मैं
    बहुत खूब। दाद क़ुबूल कीजिये।

    इमरान साहब दुबारा कमेंट करना पड़ा, पहले मेरा नाम नहीं आ पाया था, मुआफी चाहता हूँ |

  2. wah wah wah… itni barjasta ghazal… itni ghalon ko padhne ke baad agar koi ghazal taza dum maloom ho to isme padhne wale ki nahi, kahne wale ki saari khoobiyan dikhti hain… bahi imran sahab poori ghazal bahot bahot mubarak…

  3. मैं भी क्या दूसरों के जैसा हूँ
    ख़ुद को बाहर से देखना है मुझे
    मौज दर मौज मिट रहा हूँ मैं
    कौन साहिल पे लिख गया है मुझे
    वाह वाह बहुत ख़ूब आज़ाद साहब।

  4. इमरान मेरी जान क्या ही अच्छा कह रहे हैं। आपसे उम्मीदें बढ़ने लगी हैं। अच्छी ग़ज़ल कही और ये दो शेर तो दिल में उतर गये। वाह वाह

    बात सच है मगर कहूँ कैसे
    तिशनगी ने डुबो दिया है मुझे

    मौज दर मौज मिट रहा हूँ मैं
    कौन साहिल पे लिख गया है मुझे

  5. इमरान साहब बेहद खूबसूरत ग़ज़ल हुई है।

    मौज़ दर मौज़ मिट रहा हूँ मैं
    बहुत खूब। दाद क़ुबूल कीजिये।

  6. मौज दर मौज मिट रहा हूँ मैं
    कौन साहिल पे लिख गया है मुझे
    Imran miyan, Zindabad. khoob ghazal hai., Wah

  7. ज़िन्दगी से तो और क्या है मुझे
    बस ज़रा वक़्त काटना है मुझे
    इस उम्र मे ये ख्याल ??!! इमरान मेरे भाई ! बेखुदी, बेपरवाही बाद की बातें हैं –इस उम्र में तो दिल में उमंग उठे है तरंग जगै है !! बहरसूरत शेर पर पूरे दाद !!
    तुझको देखा तो ये लगा है मुझे
    इश्क़ सदियों से जानता है मुझे
    वाह वाह वाह वाह !! अच्छा कहा अच्छा कहा है !!
    आशना सड़कें, अजनबी चेहरे
    शह्र में और क्या दिखा है मुझे
    इस शेर के लिये तुम्हारा माथा चूम लूँ ! बहुत खूब !!
    लोग क़ीमत मिरी लगाते हैं
    किस जगह तूने रख दिया है मुझे
    हज़रत युसुफ़ की जगह !! क्या बात है !!!
    सुब्ह रुख़्सत करे मकाँ मेरा
    शाम को ख़ुद ही ढूँढता है मुझे
    इस शेर पर भी पूरी दाद !! दौरे हाज़िर के मसाइल भी छुपे हैं इस शेर में !!
    मैं भी क्या दूसरों के जैसा हूँ
    ख़ुद को बाहर से देखना है मुझे
    खुद को अपनी अना के हिसार से बाहर निकल कर देखना खूब्सूरत ज़ज़्बा है ये !!
    बात सच है मगर कहूँ कैसे
    तिशनगी ने डुबो दिया है मुझे
    तेरे कदमों में बिछ जायेगा दरिया
    तू अपनी तिशंगी को पी गया तो !!
    मौज दर मौज मिट रहा हूँ मैं
    कौन साहिल पे लिख गया है मुझे
    इस शेर पर भी ढेर सारी दाद !!
    इमरान भाई !! दिल जीत लिया आपकी ग़ज़ल ने बहुत खूब !! आल्ल्लाह करे ज़ोरे कलम और ज़ियादा .. –मयंक

  8. सुब्ह रुख़्सत करे मकाँ मेरा
    शाम को ख़ुद ही ढूँढता है मुझे

    मौज दर मौज मिट रहा हूँ मैं
    कौन साहिल पे लिख गया है मुझे

    वाह, बहुत खूब ।
    -राहुल ‘राज’

  9. Imraan bhai ..kya hi khoobsoorat gazal hui hae… ek se ek badhkar she’r hue hein…dili daad or dheron mubarakbaad
    Pooja

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