22 टिप्पणियाँ

T-29/39 बाद मुद्दत के वो मिला है मुझे-नीरज गोस्वामी

बाद मुद्दत के वो मिला है मुझे
डर जुदाई का फिर लगा है मुझे

आ गया हूँ मैं दस्तरस में तेरी
अपने अंजाम का पता है मुझे

क्या करूँ ये कभी नहीं कहता
जो करूँ उसपे टोकता है मुझे

तुझसे मिलके मैं जब से आया हूँ
हर कोई मुड़ के देखता है मुझे

अब तलक कुछ वरक़ ही पलटे हैं
तुझको जी भर के बांचना हैं मुझे

ठोकरें जब कभी मैं खाता हूँ
कौन है वो जो थामता है मुझे ?

सोचता हूँ ये सोच कर मैं उसे
वो भी ऐसे ही सोचता है मुझे

मैं तुझे किस तरह बयान करूँ
ये करिश्मा तो सीखना है मुझे

नींद में चल रहा था मैं ‘नीरज’
तूने आकर जगा दिया है मुझे

नीरज गोस्वामी 09860211911

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22 comments on “T-29/39 बाद मुद्दत के वो मिला है मुझे-नीरज गोस्वामी

  1. अच्छी ग़ज़ल हुई है सर, दाद क़ुबूल करिये और कई सारी पेंडिंग पार्टियों की लिस्ट में एक और पार्टी जोड़ लीजिए। 😀

  2. Kya kahne neeraj Sir …kya hi achhe ash-aar huye hain …waahh waahh waahhhh
    dili mubarakbad

    sadar
    Alok

  3. Bahut khoobsurt Ghazal wah wah kya kahne umda dheron daad

  4. are kya kahne neeraj ji… khoob ghazal hui hai… saare she’r acche hue hain…

  5. बाद मुद्दत के वो मिला है मुझे
    डर जुदाई का फिर लगा है मुझे

    कमाल का मतला हुआ है नीरज जी ….अहा

    आ गया हूँ मैं दस्तरस में तेरी
    अपने अंजाम का पता है मुझे

    क्या ही अच्छी गिरह लगाई है …वाह वाह वाह ….क्या कहने

    अब तलक कुछ वरक़ ही पलटे हैं
    तुझको जी भर के बांचना हैं मुझे

    सोचता हूँ ये सोच कर मैं उसे
    वो भी ऐसे ही सोचता है मुझे

    मैं तुझे किस तरह बयान करूँ
    ये करिश्मा तो सीखना है मुझे

    ऐसे अच्छे अच्छे शेर की बस मज़ा आ गया ….वाह वाह नीरज जी ….एक बेहद कामयाब ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत मुबारक़बाद

  6. वाह वाह क्या बात ,,,हर एक शेर लाजवाब,,बाकमाल ग़ज़ल हुई है सर बहुत बहुत बधाई

  7. नीरज भाई बेहतरीन, खुबसूरत, बेहद हसीन ग़ज़ल|

    आ गया हूँ मैं दस्तरस में तेरी
    अपने अंजाम का पता है मुझे

    क्या करूँ ये कभी नहीं कहता
    जो करूँ उसपे टोकता है मुझे

    मुबारकबाद आपको.|

  8. Wah wah Neeraj bhai !! Kya baaat hai !! Ye ghazal singer,s paradise hai !! Ga kur dekhiye !! beshtar sher kalfiye par aa kar aur roshan hote hain !! bahut khoob !!
    बाद मुद्दत के वो मिला है मुझे
    डर जुदाई का फिर लगा है मुझे
    hur mulakat ka anjaam maloom hai isaliye !!!

    आ गया हूँ मैं दस्तरस में तेरी
    अपने अंजाम का पता है मुझे
    bahut umda girah lagai hai !! Dad !!
    क्या करूँ ये कभी नहीं कहता
    जो करूँ उसपे टोकता है मुझे
    aappar ye ikhtiyaar usako apane hi to diya hai !! waise zaroori hai aisi kisi shay ki presence zindagi me !!!
    तुझसे मिलके मैं जब से आया हूँ
    हर कोई मुड़ के देखता है मुझे
    Isliye ki ab aapaka rang wo nahin hai jo pehale tha !!! apako kisi ne apase chhen liya hai !! Log isliye dekhate hain ki is paikar me pahale Neeraj tha ab kaun hai !! Ha ha ha !!

    अब तलक कुछ वरक़ ही पलटे हैं
    तुझको जी भर के बांचना हैं मुझे
    zaroori hai bhai !! kyonki –
    hur adami me hote hain dus bees aadami
    jisko bhi dekhana ho kai baar dekhana -nida

    ठोकरें जब कभी मैं खाता हूँ
    कौन है वो जो थामता है मुझे ?
    Is andhere me to thokar hi ujala degi –lihaja Thokar khud me ek sabak hai aur iski rehabari achhi hai !!

    सोचता हूँ ये सोच कर मैं उसे
    वो भी ऐसे ही सोचता है मुझे
    ise ghalatfehami kahiye ya khushfehami -lekin ye bani rehani chahiye !! goodwishes
    मैं तुझे किस तरह बयान करूँ
    ये करिश्मा तो सीखना है मुझे
    khair aaj tak to koi use bayaan nahin kur saka !! sirf ek sher MOMIN ka usako bayan kurta hua abhi tak sartaaj hai —
    TUM MERE PAAS HOTE HO GOYA
    JAB KOI DOOSAR NAHIN HOTA

    नींद में चल रहा था मैं ‘नीरज’
    तूने आकर जगा दिया है मुझे

    NEERAJ BHAI !! Jitani tareef karoon kum hogi !! bahut khoobsoorat ghazal kahi hai –mayank

  9. waaah lazwAb ग़ज़ल नीरज साहेब खूबसूरत मतला सारे अशआर खूब
    सबसे प्यारा शेर लगा
    क्या करु ये कभी नही कहता
    जो करु उसपे टोकता है मुझे

  10. Waah.. achchi gazal hui hae Neeraj ji.
    Dheron daad haazir hae.qubool keejiye
    Sadar
    Pooja☺

  11. क्या करूँ ये कभी नहीं कहता
    जो करूँ उसपे टोकता है मुझे

    तुझसे मिलके मैं जब से आया हूँ
    हर कोई मुड़ के देखता है मुझे
    Bahut achi gazal hui sir
    Dili daad qubul kijiye

  12. नीरज साहब हर शेर उम्दा, पूरी ग़ज़ल भरपूर, वाह वाह, ज़िंदाबाद, सैकड़ों दाद

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