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T-29/38 इश्क़ में तेरे क्या हुआ है मुझे-‘काविश’ हैदरी

इश्क़ में तेरे क्या हुआ है मुझे
जिसको देखो वो देखता है मुझे

किस क़दर दूरियां हैं उल्फ़त में
तुझसे मिल कर पता चला है मुझे

वही मिलता है अजनबी की तरह
मुद्दतों से जो जानता है मुझे

दर्द, हसरत, फ़िराक़, तन्हाई
इश्क़ ने और क्या दिया है मुझे

कैसे कह दूँ कि कोई रब्त नहीं
मैं उसे और वो सोचता है मुझे

जिसको पाला था आस्तीनों में
अब वही सांप डंस रहा है मुझे

शेरगोई का ये गुले-ताज़ा
शहरे-पुरख़ार से मिला है मुझे

हक़-बयानी से पहले ऐ ‘काविश’
अपने अंजाम का पता है मुझे

‘काविश’ हैदरी

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6 comments on “T-29/38 इश्क़ में तेरे क्या हुआ है मुझे-‘काविश’ हैदरी

  1. Behtareen Gazal!! Daad kubool karein!!

  2. Kaawish sahab behtareen Ghazal. Jaandaar Matla, matla ta maqta sabhi sher behtareen, Daad Haazir hai Qabool kare’n.
    Shafique Raipuri

  3. कैसे कह दूँ कि कोई रब्त नहीं
    मैं उसे और वो सोचता है मुझे

    काविश जी….बहुत अच्छे अच्छे शेर पढ़ाए आपने …

    वाह …बहुत मुबारक़बाद

  4. Bahut achi gazal hui sahab
    Dili daad qubul kijiye

  5. बहुत उम्दा मतले, साथ ही अच्छी ग़ज़ल के लिए दाद क़ुबूल फ़रमाइये। आपका मोबाइल नंबर नहीं है। कृपया भेजिये। कोई साहब आपसे बात करना चाहें तो कैसे मुमकिन हो ?

  6. Behtareen Ghazal…Daad Kaboolen

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