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T-29/36 ये तो अहसास हो गया है मुझे-‘शरीफ़’ अंसारी

ये तो अहसास हो गया है मुझे
कोई दर पर्दा देखता है मुझे

दोनों आलम में ऐ मिरे मुहसिन
इक तिरा ही तो आसरा है मुझे

अपना जलवा दिखा के महफ़िल में
उसने दीवाना कर दिया है मुझे

देखना है निभाओगे कब तक
तुमने अपना तो कह दिया है मुझे

शब की तन्हाई में ख़ुदा जाने
कौन है जो पुकारता है मुझे

जिसको भूले हुए ज़माना हुआ
आज वो याद आ रहा है मुझे

मौजज़न प्यार के समंदर को
तेरी आँखों में देखना है मुझे

कौन है मेरा मुहसिनो-हमदम
ज़िन्दगी भर ये सोचना है मुझे

फिर से कहिये ‘शरीफ़े-आग़ाज़ी’
किसने दिल में बसा लिया है मुझे

‘शरीफ़’ अंसारी बिलासपुरी 09817965460

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5 comments on “T-29/36 ये तो अहसास हो गया है मुझे-‘शरीफ़’ अंसारी

  1. देखना है निभाओगे कब तक
    तुमने अपना तो कह दिया है मुझे

    अहा क्या अच्छी ग़ज़ल कही है वाह…

    बहुत मुबारक़बाद

  2. देखना है निभाओगे कब तक
    तुमने अपना तो कह दिया है मुझे….waah waah kya kahne.. shareef sahab
    Dheron daad hazir hae
    Sadar
    Pooja

  3. Wahhhhhhh
    Khubsurat gazal
    Dili daad qubul kijiye

  4. देखना है निभाओगे कब तक
    तुमने अपना तो कह दिया है मुझे

    हाय, क़यामत का शेर, सैकड़ों दाद, हज़ारों दाद, वाह वाह

  5. Is Mukammal Ghazal par bharpoor daad pesh hai Bhai

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