10 Comments

T-29/31 क्या बताऊँ कि क्या हुआ है मुझे-गोविन्द गुलशन

क्या बताऊँ कि क्या हुआ है मुझे
आइना रास आ गया है मुझे

वो ही ले जाएगा जहाँ चाहे
एक जो रास्ता मिला है मुझे

कौन दुश्मन से जाके मिलता है
कौन अपना है सब पता है मुझे

मैं अगर टूट कर बिखर जाऊँ
मेरा दिल ही समेटता है मुझे

हद भी होती है बेवफ़ाई की
तुमने मजबूर कर दिया है मुझे

उसने तर्के-तअल्लुक़ात के बाद
ख़त में क्या क्या नहीं लिखा है मुझे

मैं ग़ज़ल में हूँ मुब्तिला, लेकिन
कोई छुप छुप के सुन रहा है मुझे

गोविन्द गुलशन 09810261241

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10 comments on “T-29/31 क्या बताऊँ कि क्या हुआ है मुझे-गोविन्द गुलशन

  1. आप सभी मित्र बंधुओं का आभार व्यक्त करता हूँ कि आपने ग़ज़ल को पसंद किया,कामना करता हूँ कि यूँ ही आप अपनी दुआओं से नवाज़ते रहेंगे.

  2. वाह, वाह.. क्या खूबसूरत शेर कहे हैं !
    बधाई !!

  3. उसने तर्के-तअल्लुक़ात के बाद
    ख़त में क्या क्या नहीं लिखा है मुझे

    बहुत अच्छी ग़ज़ल पढ़ाई आपने , वाह

    बहुत बहुत मुबारक़बाद

  4. Wah kya kahne umda Ghazal wah

  5. Kya hi acchhii gazal hui hai gobind gulshan Sahab
    Dhero.n daad

    Sadat
    Alok mishra

  6. खूबसूरत मकता मतला खूबसूरत ग़ज़ल वाआआः गोविन्द साहेब

  7. Govind Bhai is Mukammal Ghazal ke liye daad kabool karen .

  8. उसने तर्के-तअल्लुक़ात के बाद
    ख़त में क्या क्या नहीं लिखा है मुझे
    Wah

  9. भाई इतनी व्यस्तता में भी आपने तरही महफ़िल के लिये वक़्त निकाला। बहुत बहुत धन्यवाद

  10. achchi ghazal gulshan ji…

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