14 टिप्पणियाँ

T-29/29 ये नया तजरुबा हुआ है मुझे-इरशाद ख़ान सिकंदर

ये नया तजरुबा हुआ है मुझे
चाँद ने चूमकर पढ़ा है मुझे

अपनी पीठ आप थपथपाता हूँ
इश्क़ पर आज बोलना है मुझे

देखिये क्या नतीजा हाथ आये
वो गुणा-भाग कर रहा है मुझे

मुझको जी भर के तू बरत ऐ दिन
शाम होते ही लौटना है मुझे

आपका साया भी वहीँ उभरा
रौशनी ने जहाँ लिखा है मुझे

आँसुओं की ज़मीं हुई ज़रखेज़
ज़ख़्म अब काम का मिला है मुझे

देखना ये है वक़्त का बनिया
किस तराज़ू में तोलता है मुझे

क्या कोई आठवां अजूबा हूँ
क्यों भला शह्र घूरता है मुझे

ऐसे में जबकि सो रहे हों सब
फ़र्ज़ कहता है जागना है मुझे

अब हुआ वस्ल चुटकियों का खेल
इस क़दर हिज्र ने गढ़ा है मुझे

इरशाद ख़ान सिकंदर 09818354784

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14 comments on “T-29/29 ये नया तजरुबा हुआ है मुझे-इरशाद ख़ान सिकंदर

  1. वाह इरशाद भाई.. कई शेर लाजवाब है.
    बढ़िया ग़ज़ल !!

  2. अपनी पीठ आप थपथपाता हूँ
    इश्क़ पर आज बोलना है मुझे

    मुझको जी भर के तू बरत ऐ दिन
    शाम होते ही लौटना है मुझे

    आपका साया भी वहीँ उभरा
    रौशनी ने जहाँ लिखा है मुझे

    आँसुओं की ज़मीं हुई ज़रखेज़
    ज़ख़्म अब काम का मिला है मुझे

    अब हुआ वस्ल चुटकियों का खेल
    इस क़दर हिज्र ने गढ़ा है मुझे

    इरशाद भाई, ऐसे शेर सिर्फ आप कह सकते हैं,

    क्या ही अच्छी ग़ज़ल हुई है….. हमेशा की तरह

    आपका

    दिनेश

  3. ये नया तजरुबा हुआ है मुझे
    चाँद ने चूमकर पढ़ा है मुझे
    रश्क़ हो रहा है इस तज्रिबे पर !! मेरा शेर ये है — आँखों मे बस गया कोई, बाँहों से दूर है
    चाहा है चाँद को, यही अपना क़ुसूर है –मयंक
    अपनी पीठ आप थपथपाता हूँ
    इश्क़ पर आज बोलना है मुझे
    मैं खुद ही जल्वारेज़ हूँ खुद ही निगारे शौक़
    श्फ़्फ़ाफ पानियों पे झुकी डाल की तरह – शिकेब
    देखिये क्या नतीजा हाथ आये
    वो गुणा-भाग कर रहा है मुझे
    नया शेर !! नतीजा मायूस ही करेगा –फिर भी गुणा- भाग वालों से दूरी अच्छी !!!
    मुझको जी भर के तू बरत ऐ दिन
    शाम होते ही लौटना है मुझे
    खूबसूरत शेर !! ज़िन्दगी के तवील सफर की दास्तान –दिन और शाम बोल रहे हैं !!
    आपका साया भी वहीँ उभरा
    रौशनी ने जहाँ लिखा है मुझे
    कमाल कमाल कमाल !!! दिल जीत लिया इस शेर ने !!!
    आँसुओं की ज़मीं हुई ज़रखेज़
    ज़ख़्म अब काम का मिला है मुझे
    फिर दाद दाद !!
    ऐसे में जबकि सो रहे हों सब
    फ़र्ज़ कहता है जागना है मुझे
    ज़िन्दगी कौम मुल्क और इंसानियत सबके लिये जागना ज़रूरी है !!
    अब हुआ वस्ल चुटकियों का खेल
    इस क़दर हिज्र ने गढ़ा है मुझे
    इस शेर पर भी भरपूर दाद !!
    इरशाद भाई बहुत अच्छे शेर कहे हैं !! दाद !! –मयंक

  4. शानदार ग़ज़ल वक़्त का बनिया किस तराज़ू में तौलता है मुझे वाह

  5. Irshad bhai… yun to poori ghazal umda hai… par yw do sher
    आपका साया भी वहीँ उभरा
    रौशनी ने जहाँ लिखा है मुझे

    आँसुओं की ज़मीं हुई ज़रखेज़
    ज़ख़्म अब काम का मिला है मुझे
    Kya kahne…Zindabaad

  6. मुझको जी भर के तू बरत ऐ दिन
    शाम होते ही लौटना है मुझे

    आपका साया भी वहीँ उभरा
    रौशनी ने जहाँ लिखा है मुझे

    आँसुओं की ज़मीं हुई ज़रखेज़
    ज़ख़्म अब काम का मिला है मुझे

    देखना ये है वक़्त का बनिया
    किस तराज़ू में तोलता है मुझे
    Wahhhhhhh dada
    Lajawab gazal hui
    Dili daad qubul kijiye
    Sadr
    Imran

  7. मुझको जी भर के तू बरत ऐ दिन
    शाम होते ही लौटना है मुझे

    देखना ये है वक़्त का बनिया
    किस तराज़ू में तोलता है मुझे

    Khoob gazal kahi aur yeh sher to khaas hai!! Daad kubool kare!!

  8. देखिये क्या नतीजा हाथ आये
    वो गुणा-भाग कर रहा है मुझे

    Zindabaad Irshad Bhai…jabardast Ghazal…Daad kaboolen dheron dher.

  9. आपका साया भी वहीँ उभरा
    रौशनी ने जहाँ लिखा है मुझ

    Har sher se ek noor chhitakti hui…labaalab ahsaas se bhara bua….saadar naman mere ustad ji…

  10. आँसुओं की ज़मीं हुई ज़रखेज़
    ज़ख़्म अब काम का मिला है मुझे
    bahut umdah gazal hui hai dada

    waahh waahh

    sadar
    Alok

  11. Kya kaha jaaye irshaad ji siwa iske ki behtareen gazal ke liye dheron daad or dili mubarakbaad qubool keejiye
    Sadar
    Pooja

  12. साहिबो, इरशाद की ग़ज़ल महज़ इत्तिफ़ाक़ नहीं है कि तरह में 29वें नंबर पर पोस्ट हुई। इसे तरह की पोस्टिंग के तौर पर देखें तो ये 29/29 है यानी नतीजा 1 बरामद होता है। एक नंबर की ग़ज़ल, हर शेर भरपूर, हर शेर करारा वार, पूरी ग़ज़ल ज़बानो-बयान की कसौटी पर खरी, चोखी, मीठी। वाह वाह वाह वाह

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