30 टिप्पणियाँ

T-29/26 साल ये कौन सा नया है मुझे-आलोक मिश्रा

साल ये कौन सा नया है मुझे
वो ही गुज़रा, गुज़ारना है मुझे

चौक उठता हूँ आँख लगते ही
कोई साया पुकारता है मुझे

क्यों बताता नहीं कोई कुछ भी
आख़िर ऐसा भी क्या हुआ है मुझे

तब भी रौशन था लम्स से तेरे
वरना कब इश्क़ ने छुआ है मुझे

आदतन ही उदास रहता हूँ
वरना किस बात का गिला है मुझे

अब के अंदर के घुप अंधेरों में
एक सूरज उजालना है मुझे

मुस्तक़िल चुप से आसमाँ की तरह
एक दिन ख़ुद पे टूटना है मुझे

मेरी तुर्बत पे फूल रखकर अब
वो हक़ीक़त बता रहा है मुझे

क्या ज़ुरूरत है मुझको चेहरे की?
कौन चेहरे से जानता है मुझे

आलोक मिश्रा 09711744221

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30 comments on “T-29/26 साल ये कौन सा नया है मुझे-आलोक मिश्रा

  1. साल ये कौन सा नया है मुझे
    वो ही गुज़रा, गुज़ारना है मुझे

    यार…. तसव्वुर ही बेचैन कर रहा है … कमाल का मतला …. वो ही गुज़रा गुज़ारना है मुझे…ज़िंदाबाद भाई

    चौक उठता हूँ आँख लगते ही
    कोई साया पुकारता है मुझे

    अहा …. ये अकेलापन, ये मंज़र … हाय ये रंग उदासी के

    क्यों बताता नहीं कोई कुछ भी
    आख़िर ऐसा भी क्या हुआ है मुझे

    वाह वाह वाह वाह …..क्या कहूं …हाय …कैसे कह पाते हो ऐसे शेर

    आदतन ही उदास रहता हूँ
    वरना किस बात का गिला है मुझे

    रात पिछले पहर वो हवाएं चलीं ……:)

    मुस्तक़िल चुप से आसमाँ की तरह
    एक दिन ख़ुद पे टूटना है मुझे

    ऐसे होते हैं शेर…दहाड़ना इसे कहते हैं …वाह वाह वाह वाह ….ज़िंदाबाद भाई ज़िंदाबाद …

    क्या ज़ुरूरत है मुझको चेहरे की?
    कौन चेहरे से जानता है मुझे

    भाई क्या ही अच्छे अच्छे शेर हुए हैं … देर तक गूंजते रहेंगे ज़ेहन में … कई दिनों की खुराक मिल गयी शायरी को ….

    वाह वाह

  2. Waah Alok…Kamaal Kamaal…poori tarahi ko aalokit kar diya hai aapne…Zindabaad…Poori ghazal behtareen hai.

  3. कमाल की ग़ज़ल आलोक भाई..

    क्या ही कहने.

  4. मुसल्सल ग़ज़ल एक ही रंग की –ब्लैक एण्ड व्हाइट !! अवसाद और अंतर्मुख़ी आत्मविष्लेषण !! आलोक अगर ये ग़ज़ल तस्व्वुर से आई तो कमाल है –अगर अहसास से आई तो तकलीफ्देह यूँ है कि इस स्वर को एक नौजवान शाइर का अहसास मानने के बाद मैं ज़िन्दगी में एक बार फिर टूट जाऊँगा !! एक लम्बा वक़्त मैंने भी इस मन:स्थिति मे काटा है – लेकिन खुद को रिक्लेक्ट करने वाला भी एक शेर इस ग़ज़ल में है — अब के अंदर के घुप अंधेरों में
    एक सूरज उजालना है मुझे
    गज़ल बहुत मर्म्स्पर्शी है। जगजीत सिंह जैसे किसी स्लो पिच पर गाने वाले की सिंगर्स पैराडाइज़ !! बेखुदी,बेपरवाही साकार हो कर बोल रही है जैसे –ये शेर था – हमारे घर की दीवारों पे नासिर
    उदासी बाल खोले सो रही है
    इस आवाज़ इस शिल्प पर पूरी दाद !! –मयंक

  5. एक सूरज उजालना है मुझे वाह खूब ग़ज़ल हुई आलोक साहेब

  6. क्यों बताता नहीं कोई कुछ भी
    आख़िर ऐसा भी क्या हुआ है मुझे

    क्या ज़ुरूरत है मुझको चेहरे की?
    कौन चेहरे से जानता है मुझे
    kya barjastagi hai aapke ashaar mein… wah…

  7. Bahut umda ghazal hui hai aalok… kya kahne kya kahne… Matla…
    मुस्तक़िल चुप से आसमाँ की तरह
    एक दिन ख़ुद पे टूटना है मुझे
    Ye sher… aur aakhiri sher.. balaa ke hain.. zindabaad… dher saari daad…

  8. क्यों बताता नहीं कोई कुछ भी
    आख़िर ऐसा भी क्या हुआ है मुझे
    Is sher pe khaas daad kubool farmayein!! behtareen gazal!!

  9. आदतन ही उदास रहता हूँ
    वरना किस बात का गिला है मुझे
    अब के अंदर के घुप अंधेरों में
    एक सूरज उजालना है मुझे….
    Waah kya kahne alok ji..
    Umda gazal ke liye dheron daad haazir hae
    Sadar
    Pooja

  10. kya achhi ghazal hui hai Alok bhai..matla aur
    आदतन ही उदास रहता हूँ
    वरना किस बात का गिला है मुझे
    ye sher bahut pasand aaye..waah

  11. चौक उठता हूँ आँख लगते ही
    कोई साया पुकारता है मुझे

    क्यों बताता नहीं कोई कुछ भी
    आख़िर ऐसा भी क्या हुआ है मुझे

    तब भी रौशन था लम्स से तेरे
    वरना कब इश्क़ ने छुआ है मुझे
    Kya hi lajawab gazal hui bhai
    Wahhhhhhh Wahhhhhhh

  12. आलोक आपको भी कोई दाद नहीं ,कुछ नहीं कहना फ़ौरन इनआम लेने के लिये आइये।इरशाद ये बेटा हमारे चेहरे रौशन करेगा

  13. आदतन ही उदास रहता हूँ
    वरना किस बात का गिला है मुझे

    Kyaa baat hai…kaun sa sher quote karun…waah

  14. आदतन ही उदास रहता हूँ
    वरना किस बात का गिला है मुझे

    Kyaa baat hai…kaun sa sher quote karun…waah…

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