12 Comments

T-29/17 आपका ग़म अगर अता है मुझे-अभय कुमार ‘अभय’

आपका ग़म अगर अता है मुझे
मेरे हर दर्द की दवा है मुझे

क़तरा-क़तरा लहू है नश्शा-ए-मय
उम्र ने उम्र भर पिया है मुझे

क्या ज़ुरूरत है ख़ुद को देखूं मैं
देखने वाला देखता है मुझे

तुझको महवे-सितम भी देख लिया
और क्या है जो देखना है मुझे

हर घड़ी तुझको सोचता हूँ मैं
क्या कभी तू भी सोचता है मुझे

हर नफ़स तू है तू हर इक धड़कन
ज़िन्दगी का ये मशग़ला है मुझे

हो सितम या करम तिरी मर्ज़ी
तेरा मतलूब फ़ैसला है मुझे

ज़िन्दगी भर की जुस्तजू का सिला
तुझको खोया न तू मिला है मुझे

देखना कुछ भी मैं कहीं चाहूँ
ऐ ‘अभय’ तू ही दीखता है मुझे

अभय कुमार ‘अभय’ 08171611298

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

12 comments on “T-29/17 आपका ग़म अगर अता है मुझे-अभय कुमार ‘अभय’

  1. क़तरा-क़तरा लहू है नश्शा-ए-मय
    उम्र ने उम्र भर पिया है मुझे

    तुझको महवे-सितम भी देख लिया
    और क्या है जो देखना है मुझे

    ज़िन्दगी भर की जुस्तजू का सिला
    तुझको खोया न तू मिला है मुझे

    अहा …वाह वाह …क्या हसीन शेर हुए हैं …बहुत मुबारक़बाद अभय जी

  2. umda ashaar
    achchhi ghazal
    wahhh

  3. Kya kahne Abhay Sahab kya kahne
    Dili Mubarakbad

    Sadar
    Alok

  4. Matlaa bohot khoob kaha, gazal ke liye daad kubool farmayein!!

  5. आपका ग़म अगर अता है मुझे
    मेरे हर दर्द की दवा है मुझे
    दिल गया रौनके हयात गई
    ग़म गया सारी काइनात गई –जिगर
    क्या ज़ुरूरत है ख़ुद को देखूं मैं
    देखने वाला देखता है मुझे
    वाह वाह !! इसे कहते हैं आस्था !!
    हर घड़ी तुझको सोचता हूँ मैं
    क्या कभी तू भी सोचता है मुझे
    सबकी साक़ी पे नज़र हो ये ज़रूरी है मगर
    सबपे साकी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नहीं
    ज़िन्दगी भर की जुस्तजू का सिला
    तुझको खोया न तू मिला है मुझे
    खुदा ऐसे इर्फान का नाम है
    रहे सामने और दिखाई न दे –बशीर
    अभय कुमार ‘अभय’ साहब !!! बहुत खूब शेर कहे हैं हमेशा की तरह !! =– मयंक

  6. Lajawab ghazal hui sir
    Dili daad qubul kijiye
    Imran

  7. हज़रात,
    ग़ज़ल पसन्द आयी। बहुत शुक्रिया ।
    आप लोगों की हौसला अफ़ज़ाई से जो दिल प गुज़रती है, काग़ज़ प रक़म हो जाती है।
    अभय

  8. हर घड़ी तुझको सोचता हूँ मैं
    क्या कभी तू भी सोचता है मुझे

    वाह बहुत खूब वाह अच्छी ग़ज़ल हुई है /………

  9. उम्र भर उम्र ने पिया है मुझे….वाह
    ….क्या कहने अभय साहब… दाद हाज़िर है क़ुबूल करें।
    सादर
    पूजा

  10. ज़िन्दगी भर की जुस्तजू का सिला
    तुझको खोया न तू मिला है मुझे
    Kya hi umda sher hai abhay ji… Waah

  11. TUJHH KO MAHV-E-SITAM BHI DEKH LIYA
    AUR KYA HAI JO DEKHNA HAI MUJHE

    Waah waah Abhay sahab Bahut khoob,
    Daad haazir hai Qabool kare’n..

  12. वाह-वाह अभय साहब। यूँ तो पूरी ग़ज़ल उस्तादाना मगर ये शेर क़यामत है। आपका ज़ियादा कलाम लफ़्ज़ की शोभा बनना चाहिए। ज़बान की बारीकियां सीखने में आयेंगी

    ज़िन्दगी भर की जुस्तजू का सिला
    तुझको खोया न तू मिला है मुझे

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: