31 टिप्पणियाँ

T29/13 उस की आँखों ने फिर ठगा है मुझे-अंकित सफ़र

उस की आँखों ने फिर ठगा है मुझे
हिज्र इस बार भी मिला है मुझे

जिस्म नीला पड़ा है शब से मिरा
साँप यादों का डस गया है मुझे

नींद बैठी है कब से पलकों पर
और इक ख़्वाब देखता है मुझे

ज़िन्दगी की तवील राहों पर
उम्र ने रास्ता किया है मुझे

एक उम्मीद के बसेरे में
शाम होते ही लौटना है मुझे

नींद में हिचकियाँ नहीं आतीं
ख़्वाब में कौन सोचता है मुझे

प्यारे दीवानगी बचाये रख
दश्त ने देख कर कहा है मुझे

तेरी चारागरी को हो मालूम
बस तिरा लम्स ही दवा है मुझे

ख़्वाब इक झिलमिलाया आँखों में
क्या तेरी नींद ने चखा है मुझे

इक सदा हूँ तिरी तरफ बढ़ती
“अपने अंजाम का पता है मुझे”

अंकित सफ़र 09594749840

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31 comments on “T29/13 उस की आँखों ने फिर ठगा है मुझे-अंकित सफ़र

  1. जिस्म नीला पड़ा है शब से मिरा
    साँप यादों का डस गया है मुझे

    नींद बैठी है कब से पलकों पर
    और इक ख़्वाब देखता है मुझे

    तेरी चारागरी को हो मालूम
    बस तिरा लम्स ही दवा है मुझे

    इक सदा हूँ तिरी तरफ बढ़ती
    “अपने अंजाम का पता है मुझे”

    अंकित जी …क्या अच्छी ग़ज़ल कही है , सारे शेर एक मूड के हैं और बेहद संजीदगी से कहे गए हैं

    बहुत बहुत मुबारक़बाद

  2. kya acghchhi ghazal hai
    kai sher barbas ..baar baar padhne ki daawat de rahe haiN
    WAHH WAHHH

  3. Khoobsurat gazal ke liye dilee mubarakbaad!!

  4. शेर सुने भी अब पढ़े भी, बस लाजवाब !! 🙂

    जिस्म नीला पड़ा है शब से मिरा
    साँप यादों का डस गया है मुझे

    नींद बैठी है कब से पलकों पर
    और इक ख़्वाब देखता है मुझे

    प्यारे दीवानगी बचाये रख
    दश्त ने देख कर कहा है मुझे

    तेरी चारागरी को हो मालूम
    बस तिरा लम्स ही दवा है मुझे

    ये तो लाजवाब हैं !! अच्छी ग़ज़ल पर बधाई अंकित भाई !!

  5. एक उम्मीद के बसेरे में
    शाम होते ही लौटना है मुझे

    नींद हिचकियाँ नहीं आतीं
    ख़्वाब में कौन सोचता है मुझे

    प्यारे दीवानगी बचाये रख
    दश्त ने देख कर कहा है मुझे
    Bahut pyari ghazal hui ankit sahab
    Dili daad qubul kijiye

  6. उस की आँखों ने फिर ठगा है मुझे
    हिज्र इस बार भी मिला है मुझे
    मुहब्बत मे मुस्ल्सल शिकस्त मुबारक !! मतले पर दाद !!
    जिस्म नीला पड़ा है शब से मिरा
    साँप यादों का डस गया है मुझे
    अच्छा शेर कहा है !!
    नींद बैठी है कब से पलकों पर
    और इक ख़्वाब देखता है मुझे
    Observer becoming object पर खूब शेर कहा !!!
    एक उम्मीद के बसेरे में
    शाम होते ही लौटना है मुझे
    उम्मीद ताकत भी है और bekhudo के लिए लिए क़िब्लानुमा भी है !!
    तेरी चारागरी को हो मालूम
    बस तिरा लम्स ही दवा है मुझे
    वहाई रोग निदान वहाई बैद औषधि वहै !!
    इक सदा हूँ तिरी तरफ बढ़ती
    “अपने अंजाम का पता है मुझे”
    नई गिरह !!! गजल पर बधाई !!! –मयंक

  7. pyare deewangi bachaye rakh + dasht ne dekh kar kaha hai mujhe
    Ankit saheb kya hi khoob ashaar hain. Wah

  8. जिस्म नीला पड़ा है शब से मिरा
    साँप यादों का डस गया है मुझे

    ज़िन्दगी की तवील राहों पर
    उम्र ने रास्ता किया है मुझे

    तेरी चारागरी को हो मालूम
    बस तिरा लम्स ही दवा है मुझे

    ख़्वाब इक झिलमिलाया आँखों में
    क्या तेरी नींद ने चखा है मुझे

    Tumse is baar n mil paane ka afsos to tha mujhe lekin is ghazal ko padh kar bahut badh gaya hai…ek bakamaal shayar se na mil paaya…ufff…ye maine kya kiya ? Is baar jo nahin ho paya uski bharpayi agli baar sood samet karunga…pakka…Swapnil aur Pooja ko bhi bata deta hoon taki sanad rahe.

    lajawab Ghazal kahi hai – Jiyo.

  9. ज़िन्दगी की तवील राहों पर
    उम्र ने रास्ता किया है मुझे…
    वाह सफ़र साहब क्या उम्दा शेर है।
    दाद हाज़िर है
    सादर
    पूजा

  10. Zindagi ki taveel raaho’N par
    Umr ne raasta kiya hai mujhe

    Waah Bahut khoob Ankit sahab

  11. मीठी ग़ज़ल, कच्चे दूध की सौंधी ख़ुशबू से महकती ग़ज़ल। वाह वाह। जीते रहिये मगर आपकी हाज़िरी बहुत देर से हो रही है। आपको लगातार आना चाहिए।

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