12 Comments

T-29/6 ऐसे ख्वाबों से वास्ता है मुझे-‘नाज़िम’ नक़वी

ऐसे ख्वाबों से वास्ता है मुझे
जिनकी ख़ाहिश में जागना है मुझे

क्यों मुझे भी नज़र नहीं आता
वो जो हर वक़्त देखता है मुझे

सबसे रिश्ता बनाने लगता हूँ
ये अजब रोग लग गया है मुझे

यूँ छिपा फिरता हूँ ज़माने से
जैसे हर शख़्स जानता है मुझे

मैं कोई फ़ैसला नहीं लूँगा
सारा आलम कहाँ पता है मुझे

बस वही साथ है मिरे ‘नाज़िम’
बस वही याद आ रहा है मुझे

‘नाज़िम’ नक़वी 09811400468

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

12 comments on “T-29/6 ऐसे ख्वाबों से वास्ता है मुझे-‘नाज़िम’ नक़वी

  1. सबसे रिश्ता बनाने लगता हूँ
    ये अजब रोग लग गया है मुझे
    क्या अच्छा शेर कहा वाह वाह

    बहुत मुबारक़बाद

  2. यूँ छिपा फिरता हूँ ज़माने से
    जैसे हर शख़्स जानता है मुझे

    Nazim sahab…bohot khoob gazal kahi hai!!!

  3. Nazim sahab behtrin ghazal kahi hai.mubarak ho.

  4. यूँ छिपा फिरता हूँ ज़माने से
    जैसे हर शख़्स जानता है मुझे NZIM BZHI, UMDA GHAZAL K LIYE MUBARAKBAD

  5. Bahut Khoob Nazim saab! Daad haazir hai!

  6. ऐसे ख्वाबों से वास्ता है मुझे
    जिनकी ख़ाहिश में जागना है मुझे
    matale par daad !!

    क्यों मुझे भी नज़र नहीं आता
    वो जो हर वक़्त देखता है मुझे
    khuda aise irfaan ka naam hai
    rahe samane aur dikhai na de -basheer

    सबसे रिश्ता बनाने लगता हूँ
    ये अजब रोग लग गया है मुझे
    ye rog ghatak hai !!

    यूँ छिपा फिरता हूँ ज़माने से
    जैसे हर शख़्स जानता है मुझे
    khoob wah wha !!!

    मैं कोई फ़ैसला नहीं लूँगा
    सारा आलम कहाँ पता है मुझे
    great gratitude !!

    बस वही साथ है मिरे ‘नाज़िम’
    बस वही याद आ रहा है मुझे
    usi ki ye duniya hai !!
    nazim sahab !! bahut sunder bahut khoob sher kahe hain !!-mayank

  7. kya kehne..puri ghazal behad umdaa hai ..dili daad
    Kanha

  8. Wahhhhhhh Wahhhhhhh
    Bahut khubsurat ghazal hui sir
    Dili daad qubul kijiye
    Regards
    Imran

  9. umda ghazal nazim sahab
    mubarakbaad qubool keejiye

  10. Kya kahne umda

  11. bahut umda ghazal hai… nazim naqvi sahab,,,, matle se aakhr tak… kya kahne

  12. नाज़िम भाई ज़िंदाबाद, ऐसी धुली-मंझी, मद्धम लहजे की घुलावट भरी ज़बान की ग़ज़ल आपका ही ख़ासा है। हज़ारों दाद क़ुबूल फ़रमाइये

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s

%d bloggers like this: