25 टिप्पणियाँ

T-29/5 वो जो हद दर्जा चाहता है मुझे-शाहिद हसन ‘शाहिद’

वो जो हद दर्जा चाहता है मुझे
आज दुश्मन सा क्यूँ लगा है मुझे

जी के ये तज्रबा हुआ है मुझे
हर नफ़स ज़ीस्त हादसा है मुझे

जा-ब-जा हर तरफ सितम-कोशी
आसमां तुझ से ये गिला है मुझे

क्यों मैं तारीकियों को दूँ इल्ज़ाम
रौशनी ही ने क्या दिया है मुझे

अब मैं बूढ़ा हूँ, कैसे जीना है
मेरा बेटा बता रहा है मुझे

पहले ,मैं देखता था आईना
अब तो आईना देखता है मुझे

मैं खिला जब से शाख पर, तब से
गुलचीं रह रह के ताकता है मुझे

शौक़ से ग़म बनें मिरे मेहमाँ
मुस्कुराने का हौसला है मुझे

मुझको दौलत से कम नहीं ‘शाहिद’
शायरी का जो फन मिला है मुझे

शाहिद हसन ‘शाहिद’ 09759698300

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25 comments on “T-29/5 वो जो हद दर्जा चाहता है मुझे-शाहिद हसन ‘शाहिद’

  1. मुझको दौलत से कम नहीं ‘शाहिद’
    शायरी का जो फन मिला है मुझे

    बिल्कुल , यूं ही दौलत लुटाते रहिए

    बहुत मुबारक़बाद

  2. क्यों मैं तारीकियों को दूँ इल्ज़ाम
    रौशनी ही ने क्या दिया है मुझे

    Bohot khoob sher aur behtareen gazal!! Daad kubool karein!

  3. पहले ,मैं देखता था आईना
    अब तो आईना देखता है मुझे

    Aina khud main hun bahar aqsa baitha hai mera
    main wahan hun aaj tak pahuncha jahan koi nahin !!
    a rare event in the life -ultimate achievement !! to be self observer –sher par daad !!
    मैं खिला जब से शाख पर, तब से
    गुलचीं रह रह के ताकता है मुझे
    gulchin aur baghabaan dono alfaaz shairi me -parwarish karane wale aur maut ke liye istemal hote hain!! bahut sunder sheer kaha hai shahid sahib !! ek sher shikeb ka —
    isiliye to hawa rro padi darakhton par
    abhi main khil na saka tha ki rut badalane lagi –shikeb
    शौक़ से ग़म बनें मिरे मेहमाँ
    मुस्कुराने का हौसला है मुझे
    zakhmon ki tadada na poochho
    chota ghar mehaman bahut hain !!

    मुझको दौलत से कम नहीं ‘शाहिद’
    शायरी का जो फन मिला है मुझे
    tasleem !!
    ghazal par daad -mayank

  4. ख़ूब ग़ज़ल कही शहीद साहब। इन दो अशआर की दाद अलग से क़ुबूल कीजिये। वाह वाह

    क्यों मैं तारीकियों को दूँ इल्ज़ाम
    रौशनी ही ने क्या दिया है मुझे

    पहले ,मैं देखता था आईना
    अब तो आईना देखता है मुझे

  5. क्यों मैं तारीकियों को दूँ इल्ज़ाम
    रौशनी ही ने क्या दिया है मुझे
    kya kehne.. Bahut umdaa
    kanha

  6. Shahid Hasan sahab Bahut khoob, achchhe sher nikaale hain aap ne waah , Daad haazir hai Qabool kare’n.

  7. क्यों मैं तारीकियों को दूँ इल्ज़ाम
    रौशनी ही ने क्या दिया है मुझे

    पहले ,मैं देखता था आईना
    अब तो आईना देखता है मुझे

    wah wah wah kya baat hai shahid sahab…

  8. An mai budha hu,kaise jeena hai
    Mera beta bata raha hai mujhe.
    Bahut sahi baat kahi hai.

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