10 Comments

T-29/4 वक़्त गुज़रा हुआ मिला है मुझे-ज़ुल्फ़िक़ार ‘आदिल’

वो मूल ग़ज़ल जिसके मिसरे “अपने अंजाम का पता है मुझे” को तरह बनाया गया

वक़्त गुज़रा हुआ मिला है मुझे
कोई पहले से जानता है मुझे

अपने आग़ाज़ की तलाश में हूँ
अपने अंजाम का पता है मुझे

बैठे-बैठे इसी ग़ुबार के साथ
अब तो उड़ना भी आ गया है मुझे

रात जो ख़ाब देखता हूँ मैं
सुब्ह वो ख़ाब देखता है मुझे

कोई इतने क़रीब से गुज़रा
दूर तक देखना पड़ा है मुझे

फूल रक्खे हैं मेज़ पर किसने
अब ये दफ़्तर भी देखना है मुझे

होठ टकरा रहे हैं कश्ती से
कोई पानी पिला रहा है मुझे

ये तिलिस्मे-ग़मे-जहाँ ‘आदिल’
टूटता है न तोड़ता है मुझे

ज़ुल्फ़िक़ार ‘आदिल’ 00923458131278, 00923101143380, 00923343701401

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10 comments on “T-29/4 वक़्त गुज़रा हुआ मिला है मुझे-ज़ुल्फ़िक़ार ‘आदिल’

  1. ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद

  2. Bohot badhiya gazal Aadil Sahab…dilee mubarakbaad!!

  3. Ye hamaare liye subhagya ki baat hai ki ham aapko padh rahe hain…waah….आदतन ही

  4. अपने आग़ाज़ की तलाश में हूँ
    अपने अंजाम का पता है मुझे
    khiradmando se kyun poochhun ki meri ibteda kya hai // ki main is fikra me rahata hun meri inteha kya hai !!! Iqbal — bahut damdar kahan !!!

    बैठे-बैठे इसी ग़ुबार के साथ
    अब तो उड़ना भी आ गया है मुझे
    takhyyul ko parwaz lena kaise aata hai !! kuchh baat jo sirf shairi me hi kahi ja sakati hai !! bahut khoob @!!

    रात जो ख़ाब देखता हूँ मैं
    सुब्ह वो ख़ाब देखता है मुझे
    ek shlok hai Geeta me –ya nishaam srvabhootanam /tasyaam jagarti sanyami !!! Ye sher usi ilham ka real derivative hai !! tasvvuf par daad !!

    कोई इतने क़रीब से गुज़रा
    दूर तक देखना पड़ा है मुझे
    something very near to heart haunts and mends us for a long time wah wah !! kahan par poori daad !!

    ये तिलिस्मे-ग़मे-जहाँ ‘आदिल’
    टूटता है न तोड़ता है मुझे

    Ghazal par poori daad !!! kamal ke sher kahe hain !!–mayank

  5. is ghazal ke to kahne hi kyaa…

    होठ टकरा रहे हैं कश्ती से
    कोई पानी पिला रहा है मुझे

    ye sher sochta rahta hun aur sir dhunta rahta hun… kamaal ki shayri

  6. Adil sabah
    bandgi hazrat is ghazal ke liye. Ek ek sher nagina.

  7. Waah aadil ji
    Bahut pyari ghazal

    Bahut achi girah lagai hai

    Kya kahne

  8. wah wah wah… mujhe to lagta hai ki is ghazal ko padhne ke baad is zameen mein koi sher kahna kitna mushkil tareen kaam hai… adil sahab kaya baat hai… kya achchi ghazal hai…

  9. इस ग़ज़ल पर क्या कॉमेंट किया जाये ? हर शेर हीरा है। इस की पुख़्तगी ने ही मजबूर किया कि इसके मिसरे को तरह किया जाये। आदिल साहब हज़ारों दाद क़ुबूल फ़रमाइये

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