12 टिप्पणियाँ

T-29/2 मेरी क़िस्मत का मिल रहा है मुझे-फ़ज़ले-अब्बास ‘सैफ़ी’

मेरी क़िस्मत का मिल रहा है मुझे
कोई शिकवा है ने गिला है मुझे

अब तो अपने भी अब नहीं अपने
बस ख़ुदा का ही आसरा है मुझे

ये मुहब्बत है आपकी वरना
अपने बारे में सब पता है मुझे

ख़ुद को रज़्ज़ाक़ जो समझते हैं
कुफ़्र ऐसों का तोड़ना है मुझे

बेहिसी फिर न हो कभी ग़ालिब
उसको इतना झिंझोड़ना है मुझे

करके बरबाद मुझको, हैरत से
पूछते हैं कि क्या हुआ है मुझे

जो रुलाने का काम करते हैं
उनको ख़ुशहाल देखना है मुझे

सारा अफ़साना-ए-शबे-फ़ुरक़त
तेरी आँखों ने कह दिया है मुझे

रोज़े-अव्वल से ही मियां ‘सैफ़ी’
“अपने अंजाम का पता है मुझे”

फ़ज़ले-अब्बास ‘सैफ़ी’ 09826134249

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12 comments on “T-29/2 मेरी क़िस्मत का मिल रहा है मुझे-फ़ज़ले-अब्बास ‘सैफ़ी’

  1. बहुत अच्छे शेर कहे आपने

    बहुत मुबारक़बाद

  2. Bahot umda gazal hui saifi sahab
    waahh waahh

    sadar
    Alok

  3. Waah saifi sahab. Bahut achhi ghazal kahi hai har sher dil ko chho raha hai.

  4. मेरी क़िस्मत का मिल रहा है मुझे
    कोई शिकवा है ने गिला है मुझे
    Ibrahim Zauq sahib !! ki yaad ayi !! lai hayat aaye qqaza le chali chale jaisi baat hai !!

    अब तो अपने भी अब नहीं अपने
    बस ख़ुदा का ही आसरा है मुझे
    Do अब khal rahe hain inme se ek ko sab hona tha !! shayad typing mistake hai !!

    ये मुहब्बत है आपकी वरना
    अपने बारे में सब पता है मुझे
    Daad !! bagair kuchh kahe sab kahane ki art sher me hi milti hai wah wah !!

    रोज़े-अव्वल से ही मियां ‘सैफ़ी’
    “अपने अंजाम का पता है मुझे”
    No doubt !! Human beings are aware of their ultimate destiny !! Daad !! –mayank

  5. Saifi sahab
    Girah bahut hi shaandar hai….
    Umda ghazal….

  6. Waah Bahut khoob Saify Sahab kya kahne

    Khud Ko Razzaaq jo samajhte hai’N
    Kufr aiso’N ka todna hai mujh

    Kya manviyat hai Janab sher men…
    Mubarakbaad
    Shafique Raipuri

  7. bahot achcha zabaan ka sher kaha hai saify sahab… wah
    करके बरबाद मुझको, हैरत से
    पूछते हैं कि क्या हुआ है मुझे

  8. Ye muhabbat hai apki warna
    Apne bare me sab pata hai mujhe.

    Bahut khoob saifayi Sahab.

  9. मतले की सादगी पर कुर्बान! अच्छी ग़ज़ल!

  10. सैफई साहब आपकी ग़ज़ल ने तरही को मख़मली उजले से भर दिया। दाद क़ुबूल कीजिये

    ये मुहब्बत है आपकी वरना
    अपने बारे में सब पता है मुझे

    बेहिसी फिर न हो कभी ग़ालिब
    उसको इतना झिंझोड़ना है मुझे

    करके बरबाद मुझको, हैरत से
    पूछते हैं कि क्या हुआ है मुझे

  11. ये मुहब्बत है आपकी वरना
    अपने बारे में सब पता है मुझे

    खूबसूरत अशआर …

    गज़लकारों के संक्षिप्त परिचय भी लिखे जाएँ तो बेहतर रहे

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