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T-29/1 यूँ ही एड़ी पे घूमना है मुझे-स्वप्निल तिवारी ‘आतिश’

यूँ ही एड़ी पे घूमना है मुझे
अब ये नुक़ता ही दायरा है मुझे

रतजगा हूं कि नींद हूं उस की
उस ने आँखों में रख लिया है मुझे

मैं हूं तस्वीर इक ख़मोशी की
एक आवाज़ ने रचा है मुझे

उस से पहले भी गुम हुआ हूं मैं
उस ने इस बार खो दिया है मुझे

मेरे साहिल से शाम को सूरज
देर तक यूँ ही देखता है मुझे

मेरी हर इक कला से वाक़िफ़ है
चाँद बरसों से जानता है मुझे

मुझ में दरिया सा इक बहाव है सो
‘अपने अंजाम का पता है मुझे’

पासबां दिल ही है मिरा फिर भी
तेरे दर पर टटोलता है मुझे

मैं भला था तिरे तख़य्युल में
तू ने लिख कर मिटा दिया है मुझे

दिल में आया हूं अपने पहली बार
यां तो हर शख़्स जानता है मुझे

किस जगह नींद है पता है मगर
इक बुरा ख्व़ाब रोकता है मुझे

बढ़ता जाता है दायरा-ए-सराब
क्या ये सहरा डुबो रहा है मुझे

कैसा ग़म है! कि अपनी आँखों से
आंसुओं ने गिरा दिया है मुझे

स्वप्निल तिवारी ‘आतिश’ 08879464730

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39 comments on “T-29/1 यूँ ही एड़ी पे घूमना है मुझे-स्वप्निल तिवारी ‘आतिश’

  1. बढ़ता जाता है दायरा-ए-सराब
    क्या ये सहरा डुबो रहा है मुझे

    कैसा ग़म है! कि अपनी आँखों से
    आंसुओं ने गिरा दिया है मुझे

    अहा क्या कहने भैय्या बला के शेर हैं

  2. ak aur nihayat umdah gazal har baar ki tarah..
    kya kahu.n

    dili mubarakbad bhaiya

    Alok

  3. दिल में आया हूं अपने पहली बार
    यां तो हर शख़्स जानता है मुझे

    मैं हूं तस्वीर इक ख़मोशी की
    एक आवाज़ ने रचा है मुझे

    मेरी हर इक कला से वाक़िफ़ है
    चाँद बरसों से जानता है मुझे

    waah dada….lajawab….aise ashaar me aapke dastakhat milte hain….saadhu…

  4. वाह स्वप्निल भाई, क्या कहें एक-एक शेर लाजवाब.
    यूँ आपकी हर ग़ज़ल ही बेमिसाल होती है..
    दाद ही दाद !! 🙂

  5. Badi Mushkil men daal dete ho bhai…kis sher ko quote karun ? hairat men hoon…bolti band kar di hai tumne…

    रतजगा हूं कि नींद हूं उस की
    उस ने आँखों में रख लिया है मुझे

    मैं हूं तस्वीर इक ख़मोशी की
    एक आवाज़ ने रचा है मुझे

    उस से पहले भी गुम हुआ हूं मैं
    उस ने इस बार खो दिया है मुझे

    Yahin ruk jaun varna to sari ghazal fir se paste karni padegi.
    Zindabad Swapnil…tumhari tareef ke liye ab mere paas lafz nahin bache…tumhare paas hon to bhej dena pls…

  6. hamesha ki tarah lajawab ghazal !!
    lekin in do sheron ka jawab nahin —

    बढ़ता जाता है दायरा-ए-सराब
    क्या ये सहरा डुबो रहा है मुझे

    कैसा ग़म है! कि अपनी आँखों से
    आंसुओं ने गिरा दिया है मुझे
    bahut khoob wah wah Swapnil !! –mayank

  7. स्वप्निल ‘आतिश’
    भाई दाद कुबूलें ।

    यूँ ही एड़ी पे घूमना है मुझे
    अब ये नुक़ता ही दायरा है मुझे
    इस मतले का जवाब नहीं ।।।।।वाह उम्दा

    रतजगा हूं कि नींद हूं उस की
    उस ने आँखों में रख लिया है मुझे
    अच्छा शेर ।

    उस से पहले भी गुम हुआ हूं मैं
    उस ने इस बार खो दिया है मुझे
    ऐतराज न हो तो इस शेर को मुझे गिफ्ट कर दो भाई ।

    मुझ में दरिया सा इक बहाव है सो
    ‘अपने अंजाम का पता है मुझे’
    बेहतरीन गिरह ।।।।

  8. kya achchi ghazal kahi hai aapne swapnil…
    रतजगा हूं कि नींद हूं उस की
    उस ने आँखों में रख लिया है मुझे

    मेरे साहिल से शाम को सूरज
    देर तक यूँ ही देखता है मुझे
    wah wah wah

    • kya achchi ghazal kahi hai aapne swapnil…
      रतजगा हूं कि नींद हूं उस की
      उस ने आँखों में रख लिया है मुझे

      मेरे साहिल से शाम को सूरज
      देर तक यूँ ही देखता है मुझे
      wah wah wah

  9. पुख्ता शायरी! मानाखेज़ ग़ज़ल! याद रहने वाले अश’आर!

  10. वाह बहुत खूब ग़ज़ल कही है वाह…….

  11. Puri ki puri ghazal behad kamaal dada.. kya shandar shuruaat hui hai tarahi ki..dher sari dad
    Kanha

  12. Waah swapnil bhai
    Kamaal ke ashaar
    Kamaal ki ghazal

    Nakul

  13. रतजगा हूं कि नींद हूं उस की
    उस ने आँखों में रखा लिया है मुझे

    वाह वाह आतिश साहब बहुत ख़ूब , दाद हाज़िर है क़बूल करें।
    शफ़ीक़ रायपुरी

  14. Lajawab lajawab lajawab
    Kya kahu dada
    Bahut pyari gazal hui

    Regards
    Imran

  15. कैसा ग़म है! कि अपनी आँखों से
    आंसुओं ने गिरा दिया है मुझे
    Waah waah waah… dheron dher daad hajir hae dada….ye sher liye jaa rahi huun….behtareen
    Sadar
    Pooja

  16. Tiwari sahab pehli gazal aur behtareen gazal ke liye mubarakbad qubul karen …

  17. लाज़वाब स्वप्निल साहेब खूबसूरत मतला खूबसूरत अशआर
    क्या ये सहरा डुबो रहा है मुझे
    लाज़वाब ग़ज़ल मुबारकबाद

  18. kya khoob ghazal hui Swapnil bhai
    zindabaad….

  19. लो कल्लो बात। हो गयी बोलो राम। के करूँ इस गजल के बाद

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