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इश्क़ की रुत से हम आहंग-स्वप्निल तिवारी ‘आतिश’

इश्क़ की रुत से हम आहंग
दिल के अंदर एक मलंग

शब की क़ैद से भागने को
चाँद की ओट में एक सुरंग

इक मछली की राह बनें
धारों में इस बात पे जंग

अब्र की पीठ पे फैला है
छूट रहा है चाँद का रंग

सँकरी सँकरी किरणें हैं
धनक! तुम्हारा घर है तंग

मांझा अब इस ज़िद पर है
हाथ कटे या कटे पतंग

नींद में ख़ाब का कंकर फेंक
सुब्ह तलक फैलेगी तरंग

स्वप्निल तिवारी ‘आतिश’ 08879464730

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2 comments on “इश्क़ की रुत से हम आहंग-स्वप्निल तिवारी ‘आतिश’

  1. bahut shukriya seema ji..

  2. चाँद की ओट में एक सुरंग
    इक मछली की राह बनें
    धारों में इस बात पे जंग
    अब्र की पीठ पे फैला है
    छूट रहा है चाँद का रंग
    सँकरी सँकरी किरणें हैं
    धनक! तुम्हारा घर है तंग
    मांझा अब इस ज़िद पर है
    हाथ कटे या कटे पतंग
    kya बात है लाज़वाब अशआर स्वप्निल जी मुबारकबाद

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