3 टिप्पणियाँ

आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया-इमरान हुसैन आज़ाद

आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया
ज़िन्दगी हमसे कोई ठौर बनाया न गया

आसमां मुझसे मियाँ हुजरे में लाया न गया
शाइरी छोड़ दी, मफ़हूम चुराया न गया

नौकरी की, लिखी नज़्में, सुकूँ पाया न गया
शहरे-दिल तुझको किसी तौर बसाया न गया

घर की वीरानियाँ रुसवा हुईं बेकार में ही
मुझसे बाज़ार में भी वक़्त बिताया न गया

जोश में ढा तो दी रिश्ते की इमारत, लेकिन
दोनों से आज तलक मलबा हटाया न गया

ख़ून के दाग़ न आ जाएँ मिरे लहजे में
इसलिए ग़ज़लों को अख़बार बनाया न गया

दिख न जाये तू बिछड़ती हुई, बस इस डर से
मुझसे आँखों को कोई ख़ाब दिखाया न गया

अपना हिस्सा भी तो माँगा है ज़मीं से मैंने
आसमां यूँ ही मिरे सर पे गिराया न गया

जो तिरी याद के पंछी न रुके क्या है अजब
उम्र भर दिल में तो तुझको भी बिठाया न गया

ज़ात, मज़हब कि ज़ुबाँ नाम उसी के तो हैं सब
ख़ुद को जिस क़ैद से ताउम्र छुड़ाया न गया

ख़ाक दरिया के किनारों को मिलाऊंगा मैं
ख़ुद को ही आज तलक ख़ुद से मिलाया न गया

हार की वज्ह हुआ मैं ही, चलो मान लिया
पर उसी जंग की जिसमें मुझे लाया न गया

मेरा ईमान हुआ ख़र्च जिसे पाने में
क्या ग़ज़ब होगा जो उस शय को बचाया न गया

इमरान हुसैन आज़ाद 09536816624

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

3 comments on “आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया-इमरान हुसैन आज़ाद

  1. bahut achchi ghazal hui imran
    khoob saari duaayen..

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: