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अब भी बाक़ी है तज़करा मेरा-नवनीत शर्मा

अब भी बाक़ी है तज़करा मेरा
उसमें जि़ंदा है आशना मेरा

इश्क़ कहता है मैं कसैला हूँ
कौन चक्खेगा ज़ायक़ा मेरा

तर-ब-तर रहता है सफ़र दिन-रात
जुस्तजू तेरी अाबला मेरा

मकतबे-इश्क़ ? रोकता था जहान
हो गया फिर भी दाख़िला मेरा

इस कसौटी पे मैं खरा उतरूं
देखता है वो देखना मेरा

इक महावट थी खारे पानी की
बह गया सब रहा-सहा मेरा

वार उसके नपे-तुले थे मगर
बच गया दिल कटा-फटा मेरा

ज़िन्दगी ख़ुद ही हादसा है मिरी
क्या बिगाड़ेगा हादसा मेरा

तेरी गलियों से जब गुज़रता हूं
साथ चलता है मक़बरा मेरा

इक बयाबां सा शोर करता है
और मुझमें है क्या बचा मेरा

रात साये को खा गई ‘नवनीत ‘
दूर है मुझसे हमनवा मेरा

नवनीत शर्मा 09418040160

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2 comments on “अब भी बाक़ी है तज़करा मेरा-नवनीत शर्मा

  1. वाह वाह, बहुत प्यारी ग़ज़ल , ढेर सारी दाद

  2. इश्क़ कहता है मैं कसैला हूँ
    कौन चक्खेगा ज़ायक़ा मेरा

    तर-ब-तर रहता है सफ़र दिन-रात
    जुस्तजू तेरी अाबला मेरा

    मकतबे-इश्क़ ? रोकता था जहान
    हो गया फिर भी दाख़िला मेरा

    इस कसौटी पे मैं खरा उतरूं
    देखता है वो देखना मेरा

    इक महावट थी खारे पानी की
    बह गया सब रहा-सहा मेरा
    Bahut achi gazal hui sir
    Dili daad qubul kijiye
    Regards
    Imran

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