3 Comments

T-28/32 जिस में ज़िक्रे-शबाब करता हूँ-शाहिद हसन ‘शाहिद’

हज़रते-मीर तकी ‘मीर’ की ग़ज़ल जिसे तरह किया गया

आम हुक्मे-शराब करता हूँ
मोहतसिब को कबाब करता हूँ

टुक तो रह ए बिनाये-हस्ती तू
तुझ को कैसा ख़राब करता हूँ

बहस करता हूँ होके अब्जद खुवां
किस क़दर बे हिसाब करता हूँ

कोई बुझती है ये भड़क में अबस
तिश्नगी पर इताब करता हूँ

सर तलक आबे-तेग़ में हूँ ग़र्क़
अब तईं आब-आब करता हूँ

जी में फिरता है ‘मीर’ वो मेरे
जागता हूँ कि ख्वाब करता हूँ

————————————-

शाहिद हसन ‘शाहिद’ साहब की तरही ग़ज़ल

जिस में ज़िक्रे-शबाब करता हूँ
मैं वो शब इन्तिख़ाब करता हूँ

ज़िंदगानी तो ख़ूबसूरत है
मैं ही इसको ख़राब करता हूँ

अपने दुश्मन से दुश्मनी करके
मैं उसे कामयाब करता हूँ

खुद को पाता हूँ आसमानों में
जब मैं अज़्मे-उक़ाब करता हूँ

अपने ऐबों को जानने के लिए
खुद को ही बेनक़ाब करता हूँ

इक खता के इवज़, तमाम अपनी
नेकियाँ गर्क़े-आब करता हूँ

साफ करता हूँ दिल का शीशा रोज़
रोज़ ‘शाहिद’ ख़राब करता हूँ

शाहिद हसन ‘शाहिद’ 09759698300

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

3 comments on “T-28/32 जिस में ज़िक्रे-शबाब करता हूँ-शाहिद हसन ‘शाहिद’

  1. बहुत खूब ग़ज़ल हुई है बधाई …..।………

  2. Imran miyan, bahut shukriya.

  3. ज़िंदगानी तो ख़ूबसूरत है
    मैं ही इसको ख़राब करता हूँ

    अपने दुश्मन से दुश्मनी करके
    मैं उसे कामयाब करता हूँ
    Bahut achi gazal hui sir
    Dili daad qubul kijiye

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: