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T-28/29 बारिशों में अबके याद आए बहुत-बकुल देव

हज़रत मीर तक़ी मीर की ग़ज़ल जिसे तरह किया गया

ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत
दिल लगा कर हम तो पछताए बहुत

दैर से सू-ए-हरम आया न टुक
हम मिजाज अपना इधर लाये बहुत

फूल, गुल, शम्सो-क़मर सारे ही थे
पर हमें उनमें तुम्हीं भाये बहुत

‘मीर’ से पूछा जो मैं आशिक हो तुम
हो के कुछ चुपके से शरमाये बहुत

—————————————–

बकुल देव साहब की तरही ग़ज़ल

बारिशों में अबके याद आए बहुत
अब्र जो बरसे नहीं छाये बहुत

जाने किसके ध्यान में डूबा था ख़्वाब
नींद ने कंगन तो खनकाये बहुत

फिर हुआ यूं लग गया जी इश्क़ में
पहले पहले हम भी घबराये बहुत

मंज़िलों पर बार था रख़्ते सफ़र
और हम आंसू बचा लाए बहुत

मुझसे मेरा रंग मांगे है धनक
रश्क में यूं भी हैं हमसाये बहुत

दिल जो टूटा सज गया आंखों का हाट
इस खंडर से निकले पैराये बहुत

ज़िन्दगी आख़िर पशेमां कर गयी
हम इसी मुहलत प इतराये बहुत

क़ाफ़िले के ग़म में ग़म शामिल नहीं
तुम ‘बकुल’ आगे निकल आये बहुत

बकुल देव 09672992110

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4 comments on “T-28/29 बारिशों में अबके याद आए बहुत-बकुल देव

  1. Behtareen gazal.

  2. इश्क़ में जी का लगना… क्या कहने बकुल जी
    बहुत उम्दा
    दाद हाज़िर है
    सादर
    पूजा

  3. Bahut achi gazal sir
    Wahhhhhhh
    Dili daad qubul kijiye

  4. क्या कहने बकुल भाई
    उम्दा अश्आर हुए भरपूर दाद!!!

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