16 टिप्पणियाँ

T-28/21 मिरा लड़ख़डाना तिरा पास आना-पूजा भाटिया

हज़रते-मीर तक़ी मीर की ग़ज़ल जिसे तरह किया गया

न सोचा न समझा न सीखा न जाना
मुझे आ गया ख़ुद ब ख़ुद दिल लगाना

ज़रा देख कर अपना जल्वा दिखाना
सिमट कर यहीं आ न जाये ज़माना

जुबां पर लगी है वफ़ाओं कि मुहरें
ख़मोशी मिरी कह रही है फ़साना

गुलों तक लगायी तो आसां है लेकिन
है दुश्वार काँटों से दामन बचाना

करो लाख तुम मातमे-नौजवानी
प मीर अब नहीं आयेगा वो ज़माना

————————————————

पूजा भाटिया साहिबा की तरही ग़ज़ल

मिरा लड़ख़डाना तिरा पास आना
गले से लगाने का था इक बहाना

हूँ मसरूफ़ इतनी इसी काम से इक
तेरा नाम लिखना, छुपाना, मिटाना

वो महफ़िल के कोने से उठते इशारे
वही इश्क़ का है तरीक़ा पुराना

कई रंग के मुझ में किरदार हैं अब
वो लड़की हूँ जिस को कहें सब फ़साना

वो मंज़र मुझे अब भी ताज़ा करे है
वो चिड़िया का दरिया में घंटों नहाना

जहाँ जिस्म तेरा उतारा गया “मीर”
वो मिट्टी भी अब हो गयी शायराना

वो किरदार जो था कहानी पे ग़ालिब
उसे देखिये भूल बैठा ज़माना

वो स्वेटर में उलझे हुए गर्म लम्हे
नहीं भूलते अपना जादू चलाना

मुझे हो रही है हरारत तुम्हारी
दवा की तरह तुम मिरे पास आना

ज़मीं पर तुम्हारी फलक गिर न जाये
जो मुझ पर टिका है, मुझे मत हटाना

लड़ाई हुई तीरो-तरकश में जब से
बिला-खौफ़ घूमे मिरा हर निशाना

नहीं मैं, मिरे घर में मुझ-सा है कोई
करूं कैसे साबित जो पूछे ज़माना

पूजा भाटिया 08425848550

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16 comments on “T-28/21 मिरा लड़ख़डाना तिरा पास आना-पूजा भाटिया

  1. मतला ता मक़्ता शायरी और कमाल की शायरी दाद को अल्फ़ाज़ कम जज़्बात से समझ लो। अभय

  2. क्या अच्छी ग़ज़ल कही है पूजा जी! दाद और मुबारकबाद!

  3. क्या कहने पूजा जी अच्छी ग़ज़ल हुई
    मुबारकबाद क़ुबूल कीजिये

  4. वाह
    क्या बात है। बहुत प्यारी ग़ज़ल हुई है पूजा जी।

    “वो चिड़िया का दरिया में घंटों नहाना।”
    बहुत कुछ कहता हुआ ये मिसरा। ढेरों दाद।
    क्या बात है।

  5. हूँ मसरूफ़ इतनी इसी काम से इक
    तेरा नाम लिखना, छुपाना, मिटाना

    कई रंग के मुझ में किरदार हैं अब
    वो लड़की हूँ जिस को कहें सब फ़साना

    वो मंज़र मुझे अब भी ताज़ा करे है
    वो चिड़िया का दरिया में घंटों नहाना

    लड़ाई हुई तीरो-तरकश में जब से
    बिला-खौफ़ घूमे मिरा हर निशाना

    Ab kya kahen Pooja Ji…Bejod…waah…Jiyo.

  6. वो महफ़िल के कोने से उठते इशारे
    वही इश्क़ का है तरीक़ा पुराना

    कई रंग के मुझ में किरदार हैं अब
    वो लड़की हूँ जिस को कहें सब फ़साना

    वो मंज़र मुझे अब भी ताज़ा करे है
    वो चिड़िया का दरिया में घंटों नहाना
    WAHHHHHHH
    Bahut achi gazal hui pooja ji
    Dili daad qubul kijiye

  7. कई रंग के मुझ में किरदार हैं अब
    वो लड़की हूँ जिस को कहें सब फ़साना

    वाह पूजा जी..क्या कहने.

    उम्दा ग़ज़ल के लिये मुबारक.

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