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T-28/18 आँखों से झाँकती हुई हैरत को क्या हुआ-सौरभ शेखर

हज़रते-मीर तक़ी मीर की ज़मीन जिसमें ग़ज़ल कही गयी

इस अहद में इलाही मोहब्बत को क्या हुआ
छोड़ा वफ़ा को उन्ने मुरव्वत को क्या हुआ

उम्मीदवार वादा-ए-दीदार मर चले
आते ही आते यारों क़यामत को क्या हुआ

कब तक तज़ल्लुम आह भला मर्ग के तईं
कुछ पेश आया वाक़या रहमत को क्या हुआ

उसके गये पर ऐसे गये दिल से हमनशीं
मालूम भी हुआ न कि ताक़त को क्या हुआ

बख़्शिश ने मुझ को अब्रे-करम की किया ख़िज़ल
ए चश्मे-जोश अश्के-नदामत को क्या हुआ

जाता है यार तेग़-बकफ़ ग़ैर की तरफ़
ए कुश्ता-ए-सितम तिरी ग़ैरत को क्या हुआ

थी साबे-आशिक़ी की बदायत ही ‘मीर’ पर
क्या जानिये कि हाले-निहायत को क्या हुआ

———————————————-

सुरभ शेखर साहब की तरही ग़ज़ल

आँखों से झाँकती हुई हैरत को क्या हुआ
मासूमियत की अस्ल इबारत को क्या हुआ

ऐ कब से लग गया तुझे इज़हार का ये रोग़
उस पहले वाली ज़ब्त की आदत को क्या हुआ

इस मुख़्तसर बयान से तो जी नहीं भरा
तफ़सील से बताओ कि वहशत को क्या हुआ

जिस से भी मिल रहा हूँ उसी को क़रार है
चैनो-सुकूं के शह्र में उजलत को क्या हुआ

सौ सदमे खा के ख़ैर मुहब्बत तो बच गई
तलवार भांजती हुई नफ़रत को क्या हुआ

वो आदमी तो हो गया मशहूर इश्क़ में
रुसवाइयों की आग में औरत को क्या हुआ

हम तो हक़ीर थे, हमें मिट्टी निगल गई
पर यार बादशाह सलामत को क्या हुआ

‘सौरभ’ रवानगी की तुझे कितनी जल्दी थी
तुमने क़याम क्यूँ किया, रुख़सत को क्या हुआ

सौरभ शेखर 09873866653

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9 comments on “T-28/18 आँखों से झाँकती हुई हैरत को क्या हुआ-सौरभ शेखर

  1. हिन्‍दी ब्‍लॉगर्स के लिये एक खुशखबरी। अगर आप भी हिन्‍दी ब्‍लागर हैं तो एक बार इस ब्‍लॉग पर जरूर पधारें। ब्‍लॉग पर जानें के लिये यहॉ क्लिक करें

  2. bahut achchi ghazal hui Saurabh bhai…mubarakbaad

  3. Matla ta makta shandaar ghazal hui hai Saurabh bhai!!! dili mubarakbaad!! waaaaaah!!!

  4. Waah waah waah..
    Kya hi umda gazal hui hae sourabh ji.
    Dili mubarakbad dher sari daad…
    Sadar
    Pooja

  5. आँखों से झाँकती हुई हैरत को क्या हुआ
    मासूमियत की अस्ल इबारत को क्या हुआ

    ऐ कब से लग गया तुझे इज़हार का ये रोग़
    उस पहले वाली ज़ब्त की आदत को क्या हुआ
    Wahhhhhhh Wahhhhhhh
    Bahut achi Gazal hui sir
    Dili daad qubul kijiye

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