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T-27/28 मिज़ाज में कहीं थोड़ी सी बुर्दबारी रख-असलम अलाहाबादी

मिज़ाज में कहीं थोड़ी सी बुर्दबारी रख
कहीं पे हल्की कहीं पर ज़ुबान भारी रख

ये शह्र शहरे-मुहब्बत है हर क़दम पे यहाँ
ज़रूरी है कि तबीयत में इंकिसारी रख

जो चाहता है उजालों का इख़्तिताम न हो
क़दम-क़दम पे अंधेरों से जंग जारी रख

जो वक़्त पर तिरी हर बात अनसुनी कर दें
न ऐसे यार बना और न ऐसी यारी रख

अभी सफ़र में कई वादियां हैं पत्थर की
अभी से ज़ह्न में तू अपने शीशाकारी रख

यही सुबूत है इंसान ज़िंदा है ‘असलम’
दिलो-निगाह में थोड़ी सी बेक़रारी रख

असलम अलाहाबादी 09919306515

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One comment on “T-27/28 मिज़ाज में कहीं थोड़ी सी बुर्दबारी रख-असलम अलाहाबादी

  1. wah janab aslam allahabadi saheb aik achchhi ghazal se nawaza aapne…
    (waquif ansari)

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