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T-27/23 कहीं तो लहजे में थोड़ी सी इंकिसारी रख-गोविन्द गुलशन

कहीं तो लहजे में थोड़ी सी इंकिसारी रख
है क़ुर्बतों का तक़ाज़ा लिहाज़दारी रख

बुझी-बुझी हुई आँखें, धुआँ-धुआँ चेहरा
हुए हैं ग़म तुझे हासिल तो आबदारी रख

कहीं तो है वो किसी को मिले, मिले न मिले
तलाश उसकी अगर है तलाश जारी रख

ये बेख़याली न तुझको तबाह कर डाले
‘छुपाके यार तबस्सुम में बेक़रारी रख’

तुझे जो हाथ बढ़ाना है दोस्ती के लिए
तो पहले ताक़ में सब अपनी होशियारी रख

ऐ शम’अ! तुझको भी जलना है और मुझको भी
सम्हल-सम्हल के पिघलने की पासदारी रख

गोविन्द गुलशन 09810261241

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3 comments on “T-27/23 कहीं तो लहजे में थोड़ी सी इंकिसारी रख-गोविन्द गुलशन

  1. aik achchhi ghazal ke liye hazaroN daad qubul kijiye janab govind gulshan saheb…
    (waquif ansari)

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