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T-27/22 तू अपने ज़ब्त की इतनी तो पासदारी रख-डॉ मुहम्मद आज़म

तू अपने ज़ब्त की इतनी तो पासदारी रख
‘छुपा के यार तबस्सुम में बेक़रारी रख’

भले ही ज़ात में तू अपनी ख़ाकसारी रख
समझ न ले कोई बुज़दिल ये वज़अदारी रख

न हिर्स रख, न हवस रख, न होशियारी रख
किसी भी दोस्त से रिश्ता न कारोबारी रख

बिसात है अगर ऑडी भी रख, फ़रारी रख
मगर नज़र में वो ‘बांसों की भी सवारी’ रख

तअल्लुक़ात में बेहतर है बस मियाना-रवी
न दुश्मनी ही सभी से न सबसे यारी रख

फ़ने-सुख़न में तिरा नाम मोतबर होगा
मगर है शर्त दिलो-जां से मश्क़ जारी रख

ग़ज़ल ग़ज़ल ही रहे चीस्तां न बन जाये
जदीदियत में रवायत की पासदारी रख

इमेज क्या है तिरी तेरे क़द्रदानों में
ख़ुद अपने आप की इतनी तो जानकारी रख

हमारा ज़िक्र है मक़सूद तो मुअर्रिख़ सुन
बग़ैर रद्दो-बदल दास्ताँ हमारी रख

डॉ मुहम्मद आज़म 09827531331

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2 comments on “T-27/22 तू अपने ज़ब्त की इतनी तो पासदारी रख-डॉ मुहम्मद आज़म

  1. बहुत ख़ूब आज़म साहिब
    उम्दा ग़ज़ल
    ऑडी और फरारी के बाद बाँसों की सवारी
    क्या ही उम्दा शेर….वाह

  2. Wahhhhhhh Wahhhhhhh
    Kya hi gazal hui azam sir
    dili daad qubul kijiye
    SAdr

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