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T-27/17 मुबर्रा होश से हो जा जुनून तारी रख-शफ़ीक़ रायपुरी

मुबर्रा होश से हो जा जुनून तारी रख
तलाशे-नक़्शे-कफ़े-पा-ए-यार जारी रख

वफ़ा-शिआर बना ख़ुद को बुर्दबारी रख
ग़ुरूर छोड़ तबीअत में इंकिसारी रख

ये कारे-अहले-जुनूँ है ये इश्क़ है ज़ाहिद
उठा के ताक़ पे तू पहले होशियारी रख

तिरे भी क़दमों के नीचे बलंदियाँ होंगी
मिज़ाज मेरी तरह तू भी ख़ाकसारी रख

ख़मोशियाँ तिरे अंदर न चीख़ने लग जांय
सुकूत अपने लबों पर न इतना तारी रख

ज़माने ! फिर तिरे झाँसे में आऊँ नामुमकिन
ख़ुलूस अपना उठा अपनी जाँनिसारी रख

तुफ़ैल फिर किसी उस्ताद की अक़ीदत में
ज़मीं ग़ज़ल की फिर इक बार इख़्तियारी रख

‘शफ़ीक़’ माँ तिरे चेहरे से जान जायेगी
छुपा के लाख तबस्सुम में बेक़रारी रख

शफ़ीक़ रायपुरी 09406078694

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4 comments on “T-27/17 मुबर्रा होश से हो जा जुनून तारी रख-शफ़ीक़ रायपुरी

  1. Shafiq Sahab hamesha ki tarah umda gazal. In ashaar par khaas daad kubool farmayein…
    ज़माने ! फिर तिरे झाँसे में आऊँ नामुमकिन
    ख़ुलूस अपना उठा अपनी जाँनिसारी रख

    ‘शफ़ीक़’ माँ तिरे चेहरे से जान जायेगी
    छुपा के लाख तबस्सुम में बेक़रारी रख

  2. मुहतरम शफीक़ साहिब
    बेहतरीन ग़ज़ल के लिए तोहफ ए दाद कुबूल फरमाएं
    गिरह की 100% तरसील हुई है. मुबारक हो.
    ताज

  3. ख़मोशियाँ तिरे अंदर न चीख़ने लग जांय
    सुकूत अपने लबों पर न इतना तारी रख
    Bahut achi gazal hui sir
    dili daad qubul kijiye

  4. वाह वाह शफीक साहेब खूब ग़ज़ल हुई मुबारकबाद

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